'रूप की रानी चोरों का राजा', 'तेरे नाम', 'मुझे कुछ कहना है' जैसी फिल्में हमें सालों साल उनकी याद दिलाती रहेंगी।
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ये शेर सतीश कौशिक की शख्सियत के लिए ही मानो लिखा गया। हमेशा उन्होंने मायूस चेहरों पर मुस्कुराहटें बिखेरीं। सबको खुश किया और बड़े अच्छे-अच्छे किरदार निभाए। आज भी हमें पप्पू पेजर, कलंदर, मामा जी जैसे किरदार याद हैं।
सालों तक याद रहेंगी उनकी फिल्में
उन्होंने अच्छी-अच्छी फिल्में बनाईं। 'रूप की रानी चोरों का राजा', 'तेरे नाम', 'मुझे कुछ कहना है' जैसी फिल्में हमें सालों साल उनकी याद दिलाती रहेंगी। उनकी कुछ फिल्में चली और कुछ फिल्में नहीं भी चलीं। लेकिन फिल्में नहीं भी चली तो भी उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। मुस्कराते रहना ही उनकी आदत थी। मुझे उनके साथ 'राम लखन' जैसी फिल्म में काम करने का मौका भी मिला।
सतीश कौशिक जिंदगी में हर तरह से कामयाब रहे। उन्होंने जो भी अपनी जिंदगी में हासिल किया, अपनी मेहनत, व्यवहार और प्रतिभा के बल पर हासिल किया। मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त थे। मिमिक्री भी वह बहुत अच्छी करते थे।
मैंने उन्हें कभी मायूस और तनाव में नहीं देखा। भले ही वो जिस्मानी तौर पर चले गए हैं लेकिन जब तक यह इंडस्ट्री रहेगी उनकी खुशगवार यादें हमेशा रहेगी। उनकी दी हुई खुशियां हमेशा हमारे दिलों में कायम रहेंगी।
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