रूस-यूक्रेन जंग: कोरोना के वार को झेल रही दुनिया के सामने आई ये नई स्थिति भयावह है।
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उसने मुस्कुराते हुए कहा- "एक बात पूछूं?" "हां", प्रश्न पूछने वाले मित्र ने कहा। "तेरे पापा जब किसी दिन ऑफिस से टाइम पर नहीं आते। उनसे कोई कॉन्टैक्ट भी नहीं हो पाता। तब तुझे कैसा फील होता है? हमारे लिए पापा के घर न लौट पाने का यह टेंशन हर रोज, हर घड़ी साथ होता है। हम इसी के साथ जिंदगी जीते हैं। हां, यह हमारा चुना हुआ जीवन है, क्योंकि हमने खुद से पहले देश को चुना। लेकिन इससे स्थिति बदल नहीं जाती। हम भी हर वक्त यही प्रार्थना करते हैं कि युद्ध की स्थिति न बने।"
आज जब यूक्रेन और रूस के सिपाहियों की तस्वीरें, उनके अलविदा कहते संदेश सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं, तब अपनी उस मित्र की बातें और भी तेजी से मेरे जहन में गूंज रही हैं। आखिर तो युद्ध में रत सिपाही भी इंसान ही होते हैं। जिन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर देश की सुरक्षा के लिए तैयार किया जाता है। वे कोई खूनी-लुटेरे नहीं होते। उनके भी अपने परिवार होते हैं जो साथ रहकर हर त्योहार मनाना चाहते हैं।
वे भी चाहते हैं कि जब देश सेवा की अपनी ड्यूटी से घर लौटें तो उनके बच्चों के खिलखिलाते चेहरे उनका स्वागत करें, उनके बूढ़े माता-पिता के चेहरों पर खुशियां दमकें और वे तसल्ली से कुछ दिन अपने परिवार के साथ गुजार कर वापस ड्यूटी पर लौट सकें। उन वीर सिपाहियों के तिरंगे में लिपटे शरीर गौरव जरूर होते हैं लेकिन उन्हें देखकर सबका मन रोता है और उनके परिवार के सपने टूट जाते हैं।
कोरोना के वार को झेल रही दुनिया के सामने आई ये नई स्थिति भयावह है। वह दौर जब लोगों को और ज्यादा प्रेम और शांति, एकता की जरूरत है, तब युद्ध का होना बहुत ही नकारात्मक स्थिति है। तमाम राजनीतिक परिस्थितियां, कूटनीति और सत्ता का लालच एक तरफ और इंसान की जान एक तरफ। बिना इंसानों के तो कोई भी मुल्क यूं भी बेकार है।
हम भारतीय थोड़ी अलग मिट्टी के बने हैं। हम कभी भी यूं ही आगे होकर किसी पर हमला नहीं करते। ज्यादातर ऐसे मामलों में हम शांति वार्ता के जरिए उलझने सुझाने की कोशिश करते हैं। लेकिन कोई अगर हम पर हमला करता है तो मुंह तोड़ जवाब देने से हम पीछे भी नहीं हटते।
दुनिया मे अभी जो स्थिति है उसके चलते भविष्य में इस आशंका को नकारा नहीं जा सकता कि कभी हमें न चाहते हुए भी अपने देश की रक्षा के लिए हथियार उठाने पड़ें। इन लाइनों को लिखते लिखते खबर आई कि यूक्रेन बातचीत के लिए तैयार हो गया है। उम्मीद करें कि ये जंग थम जाए और अगली सुबह जब सूरज उगे तो लोग यही सोचकर दिन की शुरुआत करें कि "बुरा सपना था, बीत गया।"
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