राजेंद्र सिंह गुढ़ा और राजनीति
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अगला नंबर दिव्या मदेरणा का?
दूसरी ओर, राजेंद्र सिंह गुढ़ा की भांति कांग्रेस के ओसियां से विधायक दिव्या मदेरणा भी आए दिन कानून व्यवस्था पर सरकार को आईना दिखा रही हैं। वो खुद को पुलिस सुरक्षा में भी असुरक्षित बता चुकी हैं। राजनीतिक के जानकार मान रहे हैं कि राजेंद्र सिंह गुढ़ा के बाद अगला नंबर दिव्या मदेरणा का हो सकता है। हालांकि, दिव्या को हटाना आसान नहीं होगा, क्योंकि दिव्या जिस जाट समुदाय से आती हैं, उसे कांग्रेस नाराज नहीं करना चाहेगी।
गुढ़ा और दिव्या ही केवल अशोक गहलोत के लिए परेशानी का सबब नहीं बने हुए हैं। उनके मंत्रिमंडल के कुछ अन्य सदस्य उन्हीं के पार्टी के नेताओं के निशाने पर हैं। मंत्री प्रमोद जैन भाया और जाहिदा खान पर विधायक उंगली उठाते रहते हैं।
25 सितंबर 2022 को अशोक गहलोत गुट की बगावत के बाद कांग्रेस आलाकमान के निशाने पर मंत्री शांति धारीवाल, महेश जोशी और आरटीडीसी के चेयरमैन धर्मेंद्र सिंह राठौड़ भी हैं। तीनों मुख्यमंत्री के बेहद खास हैं और कांग्रेस आलाकमान ने तीनों को संगठन के कार्यों से दूर कर दिया है।
इस बार कांग्रेस चुनाव से दो महीने पहले प्रत्याशियों की घोषणा करने की बात कह रही है। जिस तेजी से कांग्रेस संगठन में नियुक्तियां हो रही हैं ऐसे में लग रहा है कि पार्टी की चुनावी तैयारियां काफी आगे चल रही हैं, लेकिन जिस तरह से कांग्रेस के अंदर बगावत हो रही है तो सवाल उठ रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जो एक के बाद एक लोकलुभावन योजनाओं का ऐलान कर रहे हैं, तो क्या पार्टी की गुटबाजी में वो वोटरों को रिझा पाएंगे?
यदि गुटबाजी, बयानबाजी और बगावत यूं ही बनी रही तो कांग्रेस के लिए वर्ष 2013 की स्थिति भी बन सकती है, जब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे और पार्टी को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। तब पार्टी 21 सीटों पर सिमट गई थी।
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