कोरोना के दौर में भी उन्होंने प्रगतिशील लेखक संगठन के देश भर में फैले लेखकों का उत्साहवर्धन किया और जैसे ही आने-जाने पर पाबन्दी हटी, वे जनवरी में किसान आंदोलन को अपना समर्थन देने पहुंच गए। उनके भीतर एक लेखक, एक आलोचक-समीक्षक, एक मार्क्सवादी नज़रिये से सोचने वाला और एक आंदोलनकारी एकसाथ मौजूद था।
उर्दू साहित्य के आलोचना क्षेत्र में उनकी पांच महत्त्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हैं। उनके मार्गदर्शन में दर्जनों शोधार्थियों ने शोध किए और लेखक संगठन की अपनी व्यस्तताओं के बावजूद उन्होंने सैकड़ों आलेख महत्त्वपूर्ण विषयों पर लिखे।
कमाण्डर के नाम से मशहूर प्रगतिशील लेखक संघ के तत्कालीन महासचिव कमलाप्रसाद जी के न रहने पर 2012 में प्रलेस का राष्ट्रीय सम्मलेन प्रोफ़ेसर अली जावेद के नेतृत्व में आयोजित हुआ और वहां वे राष्ट्रीय महासचिव चुने गए थे। वर्ष 2016 तक उन्होंने अपनी इस ज़िम्मेदारी का निर्वहन किया और 2016 से वे प्रलेस के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका में अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहे थे।
प्रोफ़ेसर अली जावेद को कुछ वर्ष पहले भी ब्रेन स्ट्रोक हुआ था जिससे वे अपनी जिजीविषा से उबर आए थे और पुनः सक्रिय तौर पर सांगठनिक गतिविधियों में शामिल हो रहे थे। अभी इसी अगस्त के दूसरे सप्ताह में उन्हें फिर ब्रेन हैमरेज हुआ और डॉक्टरों ने उन्हें वेंटीलेटर पर रख दिया। क़रीब 17-18 दिन तक जूझने के बाद 31 अगस्त और 1 सितंबर के बीच की रात 12 बजे वे मृत्यु के सामने हार गए।
राष्ट्रीय समिति के इस बयान में प्रोफ़ेसर अली जावेद के परिवार के लिए, उनकी पत्नी, बेटियों, बेटों और परिजनों के लिए इस बड़े दुःख की घडी में संवेदनाएं और एकजुटता दर्शाई है और कहा है कि उतनी ही मुश्किल घड़ी यह अली जावेद जी के दोस्तों के लिए भी है जिनके साथ वे हमेशा बिंदास, ठहाका लगाते भी मिलते थे और गंभीर मसलों पर गंभीरता से चर्चा करते थे।
शोक प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रगतिशील लेखक संघ अपने इस उत्कट जिजीविषा वाले साहसी और विद्वान साथी के बिछड़ने से बहुत दुःखी है और उन्हें याद करते हुए संकल्प लेता है कि हम प्रगतिशील संस्कृति का निर्माण करेंगे जो मनुष्य को मनुष्य के करीब लाने में अहम् भूमिका निभाती है,और देश को भाषाओँ, धर्मों, सम्प्रदायों, जातियों, देशभक्ति और अनेक अन्य पहचानों में बाँटकर लोगों को आपस में लड़वाने के लिए की जा रहीं साज़िशों का आख़िरी विजय तक डटकर मुक़ाबला करते रहेंगे।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।