हालांकि पंचायत के चुनावों का सांविधानिक रूप से किसी राजनीतिक दल से कोई लेना- देना नहीं होता है
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- महिलाओं-दलितों की भागीदारी बढ़ी
हालांकि पंचायत के चुनावों का सांविधानिक रूप से किसी राजनीतिक दल से कोई लेना- देना नहीं होता है, लेकिन इक्का-दुक्का उदाहरणों को छोड़ दें तो नब्बे फीसदी उम्मीदवार किसी न किसी दल के सदस्य होते हैं और उनकी मदद से चुनाव जीतते हैं। वास्तव में यह दलों के बीच का ही शक्ति परीक्षण होता है। सत्तर और अस्सी के दशक तक पंचायतों पर सामंती ताकतों का कब्जा रहता था। ये इस या उस दल के सिपहसालार के रूप में वर्चस्व के लिए काम करते थे, लेकिन 1993 में 73 वें और 74 वें संविधान संशोधन कानून के लागू होने के बाद से ग्रामीण राजनीति में नए समीकरण बनने लगे।
इस नए कानून के तहत अनुसूचित जाति व जनजाति के साथ-साथ स्त्रियों को भी पंचायत चुनाव में 33 फीसदी आरक्षण मिला। यह सच है कि अरसे तक और बहुत हद तक अभी भी, बहुत सी जगहों पर महिलाएं प्रतीकात्मक रूप में चुनाव में भागीदारी करती या जीतती आई हैं और उनके पति या परिवार के पुरुष सदस्य ही वास्तविक संचालक होते रहे हैं लेकिन कानून बनने के 28 सालों के बाद महिलाओं के पक्ष में भी समीकरण बनने लगे हैं। सत्ता में राजनीतिक भागीदारी की प्रक्रिया ही अपने आप में दलित-आदिवासी और स्त्रियों के सशक्तीकरण की दिशा में पहला कदम माना जा सकता है
- पंचायत उम्मीदवारों की परख का बदलावः सर्वे
हिमाचल विश्वविद्यालय के ग्रामीण विकास अध्ययन विभाग द्वारा इसी साल 5 से 9 जनवरी तक किया गया एक सर्वे बताता है कि पिछले 20 सालों में आम मतदाताओं के मत-व्यवहार में बदलाव आया है, जहां पहले ग्रामीण मतदाता गांव के धनाढ्य और जाति के लिहाज़ से शक्तिशाली उम्मीदवारों को वोट देना एक तरह से अपना फ़र्ज़ समझते थे, वहां अब वे उम्मीदवार की पृष्ठभूमि, उनकी प्रतिबद्धता का स्तर और पढ़ाई लिखाई के बारे में जानना चाहते हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने यह भी बताया कि स्त्री पंच या मुखिया तक पहुंच आसान होती है, वे पंचायत की बैठक दिन के समय करती हैं और आम तौर पर हिंसक धमकी या टकराव का सहारा नहीं लेतीं। हालांकि सर्वे में यह भी बताया गया है कि इन बदलते हुए समीकरणों के बावज़ूद ज्यादातर पंचायतों में चुनाव जाति, धर्म, पैसा, लिंग और राजनीतिक दलों के वर्चस्व के आधार पर लड़े जा रहे हैं।
लेखिका किरण शाहीन का परिचयः हिमाचल के गांव में रहते हुए ग्राम्य जीवन पर शोध कर रही हैं।
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