केरल जैसे प्रगतिशील माने जाने वाले राज्य में भी महिलाओं को अंगवस्त्र या ब्लाउज पहनने का हक पाने के लिए 50 साल से ज्यादा सघन संघर्ष करना पड़ा
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नांगेली का यह कदम सामंतवादी समाज के पुरुषों को उनके मुंह पर करारे तमाचे जैसा था। बात आगे पहुंची और फिर नांगेली और उसके पति से ब्रेस्ट टैक्स की मांग की जाने लगी। एक महीने बाद अधिकारी टैक्स लेने घर आ धमके। नांगेली का स्तन मापा गया। इसके बाद नांगेली घर के भीतर गई और चाकू से अपने दोनों स्तन काट केले के पत्ते पर लेकर बाहर आईं। टैक्स अधिकारी के होश उड़ गए और वे डरकर भाग गए। कुछ देर बाद ही नांगेली की मृत्यु हो गई, लेकिन उनके इस साहसिक कदम ने समाज की अन्य महिलाओं को हिम्मत दी।
इस टैक्स के विरोध में नांगेली का साथ देने का वादा करने वाले उनके पति चिरकंडुन ने उसकी चिता में कूदकर अपनी इहलीला समाप्त कर ली। किसी पुरुष के 'सती' होने की यह पहली घटना थी। देखते ही देखते ब्रेस्ट टैक्स के खिलाफ आंदोलन खड़ा हो गया। सभी जगह महिलाएं पूरे कपड़ों में बाहर निकलने लगीं। मद्रास के कमिश्नर ने त्रावणकोर के राजा को खबर भिजवाई कि महिलाओं को कपड़े न पहनने देने और राज्य में हिंसा और अशांति को न रोक पाने के कारण उसकी बदनामी हो रही है। अंग्रेजों के और नादर आदि अवर्ण जातियों के दबाव में आखिर त्रावणकोर के राजा को घोषणा करनी पड़ी कि सभी महिलाएं शरीर का ऊपरी हिस्सा वस्त्र से ढंक सकती हैं।
26 जुलाई 1859 को राजा के एक आदेश के जरिए महिलाओं के ऊपरी वस्त्र न पहनने के कानून को बदल दिया गया। और इस तरह नांगेली के बलिदान से महिलाओं ने अपना हक छीन कर हासिल किया। अजीब लग सकता है, पर केरल जैसे प्रगतिशील माने जाने वाले राज्य में भी महिलाओं को अंगवस्त्र या ब्लाउज पहनने का हक पाने के लिए 50 साल से ज्यादा सघन संघर्ष करना पड़ा। नांगेली और उसके पति ने जहां अपने प्राण त्यागे थे, उनके सम्मान में उस जगह को मुलाचीपराम्बु(महिलाओं के स्तन की भूमि) नाम दिया गया। हालांकि अब इसे मनोरमा कवाला के नाम से जाना जाता है।
आजादी के सातवें दशक में पहुंचने के बावजूद स्थितियां बहुत बदली नहीं हैं। सुबह घर से कार्यस्थल तक हमारा सामना ऐसे पुरुषों से होता है, जिनके मन में स्त्रियों के प्रति सम्मान नहीं होता। मेट्रो से लेकर बसों में रोज ही कई पुरुष महिलाओं को घूरते दिख जाते हैं। महिला दिवस पर महिलाओं से ज्यादा यह पुरुषों के लिए खास दिन होना चाहिए, जब पुरुष महिला सम्मान का संकल्प लें।
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