बहरहाल, जब मैं हैरिस के दफ्तर उनसे मिलने पहुंचा तो उन्होंने हमें पूरा दफ्तर घुमाया और कॉफी भी पिलाई। बड़ी बात है। कई मौके पर भारतीय खिलाड़ी भी आपको पानी तक नहीं पूछतें हैं। हैरिस अब एकाउंट मैनेजर का काम देखतें है। उनकी कंपनी का नाम मीडियावर्क्स है जो रेडियो स्टेशन है।
हैरिस से मेरा पहला सवाल था कि इतने मशहूर होने के बावजूद आखिर वो ऐसे सामान्य रोल में असहज महसूस नहीं करते हैं? वह बरबस ही बोल पड़े, 'देखिए, मशहूर क्रिकेटर होना मेरी पहली पारी थी और मैं अब दूसरी पारी खेल रहा हूं। न्यूजीलैंड में हमलोग खिलाड़ियों को कोई खास दर्जा नहीं देतें हैं। आम आदमी भी यहां खास है।
बहरहाल, हैरिस से बातचीत में क्रिकेट और विराट की चर्चा तो होनी ही थी। कोहली को क्या न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने सुलझा लिया है? 'ऐसा आप सोच भी कैसे सकते हैं। मैं तो कतई ये नहीं कह सकता कि टिम साउदी या फिर कोई गेंदबाजी आक्रमण विराट कोहली जैसे बल्लेबाज को काबू में रख सकता है। वो निश्चित तौर पर बड़ी वापसी करेंगे और नए प्लान के साथ आक्रमण करेंगे।
5000 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय रन बनाने वाले और 200 से ज्यादा विकेट लेने वाले हैरिस की पहचान न्यूजीलैंड के सबसे उम्दा फिल्डर्स में होती थी। एकदम जोंटी रोड्स के स्तर वाले या फिर उनके करीब वाले फिल्डर के तौर पर जाने जाते थे हैरिस। इसलिए अब वो फिर से फिल्डिंग से जुड़ना चाहते हैं। 'अगर किसी आईपीएल टीम के लिए फील्डिंग कोच या सलाहकार के तौर जुड़ने का मौका मिले तो मैं निश्चित तौर पर भारत आना चाहूंगा।'
चलते-चलते हमने हैरिस से ये भी पूछा कि क्या आपको टेस्ट सीरीज में ऐसे नतीजे की उम्मीद थी। 'बिलकुल नहीं। मुझे तो ऐसा लगा कि दूसरा टेस्ट ड्रॉ होगा। भारत ने टॉस हारने के बाद पहली पारी में मुकाबला किया और 7 रन की बढ़त भी ली। उनके गेंदबाजों ने कमाल किया लेकिन, बल्लेबाजों ने दूसरी पारी में फिर से निराश किया। मुझे लगता है कि भारत अपने टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों पर बहुत निर्भर रहता है और इसलिए वो संभल नहीं पाए। बहरहाल, हैरिस को हमने शुक्रिया कहा और हमारा न्यूजीलैंड दौरा भी इस मुलाकात के साथ खत्म हो गया।