छोटे-मोटे काम करने वालों को लिफ्ट में सवार होने से रोकने के हिमायती तकनीकी युग के नवसामंत हैं जो सिर्फ अपने लिए सुविधा-सहूलियत चाहते हैं।
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किसका अधिकार और किसकी दुनिया
इसी तरह से बिजली, वाहन, रेल और हवाई-जहाज बनाने वाले इसके उपयोग को लेकर कोई पाबंदी लगा गए होते तो आज साइंस ने इतनी तरक्की ही नहीं की होती। छोटे-मोटे काम करने वालों को लिफ्ट में सवार होने से रोकने के हिमायती तकनीकी युग के नवसामंत हैं जो सिर्फ अपने लिए सुविधा-सहूलियत चाहते हैं। यह ऊंची जाति वाले लोगों की उसी मानसिकता का विस्तार है जिसमें गांवों में दलित वर्ग के लोगों को नए कपड़े पहन कर या नए वाहन पर सवार होकर अपने सामने से गुजरने नहीं देता। इस नवसामंतवादी वर्ग को यह डर बना रहता है कि उनके साधन, उनकी संपन्नता इस तरह अऩ्य लोगों के साथ बंट न जाए, इसलिए वे छोटे-मोटे काम करने वालों पर इस तरह की पाबंदिया आयद करते हैं और उसकी स्वीकार्यता बनाकर उसे चलन में ला देते हैं।
आरक्षण का लाभ दलित-आदिवासियों को न लेने देने की मानसिकता भी यही वर्ग रखता है। यही वर्ग है जो दलित-आदिवासियों को उत्पीड़न से बचाने के लिए बने कानून को कमजोर करना चाहता है। लेकिन अब छोटे-मोटे काम करने वालो, दलितों और आदिवासियों में यह चेतना घर करने लगी है कि उन्हें उनके अधिकारों से महरूम नहीं किया जा सकता।
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