पहले आदिवासी मुख्यमंत्री जिन्होंने लगातार चार साल कुर्सी संभाली
हेमंत सोरेन ने 29 दिसंबर को अपनी सरकार की चौथी सालगिरह मनाई थी। यह चौथी सालगिरह हालांकि उनके लिए एक तरह से रिकॉर्ड ही बनाकर गई है। वह प्रदेश के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री बन चुके हैं जिन्होंने लगातार चार साल मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली है। पर पांचवें सालगिरह का शगुन उन्हें मिल पाता है या नहीं इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
हालांकि बुधवार तीन जनवरी को रांची में सत्ताधारी गठबंधन के विधायक दल की बैठक के बाद फिलहाल इस कयास पर विराम लग गया है। इस बैठक में तय हुआ कि नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा। हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री हैं और रहेंगे। उधर, तीन जनवरी को ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने मुख्यमंत्री के करीबियों पर शिंकजा कसते हुए छापेमारी करते हुए स्पष्ट संदेश दे दिया है कि आने वाले कुछ दिनों में बहुत कुछ हो सकता है।
इससे पहले साल 2023 के अंतिम दिन पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. सरफराज अहमद 'पार्टी हित' में अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंप चुके हैं। उनका इस्तीफा स्वीकार भी हो चुका है। वे गिरिडीह जिले के गांडेय सीट से विधायक थे। कयास लग रहे हैं कि उसी सीट से पार्टी कल्पना सोरेन को उपचुनाव में खड़ा करेगी। चुनाव की संभावना पर भी संकट के बादल हैं क्योंकि एक साल से कम का कार्यकाल बचा हुआ है। विधायक दल की बैठक में भी सरफराज अहमद भी शामिल हुए थे। जब उनसे पूछा गया कि तकनीकि तौर पर आप विधायक तो हैं नहीं फिर इस बैठक में शामिल होने क्या औचित्य था? मुस्कुराहट के साथ उन्हानें पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें बुलाया गया था इसीलिए वे शामिल हुए थे। उनकी मुस्कुराहट में बहुत कुछ छिपा था।
बुधवार को ही बैठक के साथ-साथ ईडी ने भी अपने तेवर दिखा दिए हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या झारखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने श्राप से मुक्त हो पाएगी? या एक बार फिर वर्तमान मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा किए बिना रुख्सत हो जाएंगे।
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