फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वंतत्रता दिवस विशेष: वैश्विक मंच पर तकनीक को शक्ति बनाकर आगे बढ़ता भारत

सार

टेक्नॉलॉजी सभ्यता को बदलने का माद्दा रखती है। बीते 5 दशकों ने तकनीक ने पूरी दुनिया की तस्वीर बदलकर रख दी है। विकासशील और पिछड़े देशों को प्रगति की ओर बढ़ाने में तकनीकी योगदान सबसे बड़ा है।भारत अपनी आजादी के 75 साल के सफर के बाद आज जितना शक्ति सम्पन्न और समृद्ध हुआ है उसमें तकनीक का विशेष योगदान है।  
विज्ञापन
15 अगस्त 2024: भारत का तकनीकी से नाता। - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अगर पूछा जाए कि आजादी क्या है? तो शायद हो सकता है कि हर कोई इसका जवाब अपने-अपने हिसाब से दे। जेल में बंद कैदी के लिए वहां से निकलना आजादी है तो नौकरी करने वाले कर्मचारी के लिए छुट्टियों पर जाना आजादी हो सकता है। ठीक ऐसे ही भारत देश ने भी 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आजादी पाई थी। कई सालों तक हम गुलामी की जंजीरों में रहे, लेकिन 1947 में हमें आजादी मिली। देखा जाए तो तब से लेकर अबतक देश ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा क्योंकि आज के समय में हम लगभग हर तरह से सक्षम बन चुके हैं। जैसे- तकनीक।

विज्ञापन


दरअसल, अगर आप देखेंगे तो पाएंगे कि तकनीक आजाद भारत को नया आयाम देती हुई नजर आ रही है। भारत टेलीकॉम, आईटी जैसे सेक्टर में काफी आगे निकल चुका है और खासतौर पर बात अगर आईटी सेक्टर की करें तो इस बात में कोई दो राय नहीं कि भारत का इस क्षेत्र में दबादबा है।

यूपीआई ने बदल दिया लेन-देन का तरीका

यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई जिसे नेशनल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया संचालित करती है। साल 2016 में इसकी शुरुआत हुई जिसने पैसों के लेन-देन को ऑनलाइन माध्यम से बेहद आसान बना दिया। आज आप देखेंगे तो लगभग हर दूसरा व्यक्ति यूपीआई का इस्तेमाल करता हुआ नजर आ जाएगा। जहां पहले लोग कैश से पेमेंट करते थे, वहीं आजाद भारत में यूपीआई का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है। एक रुपये की चीज लेनी हो या फिर हजारों या इससे ज्यादा की लोग ऑनलाइन पेमेंट पर भरोसा ज्यादा करते हुए नजर आते हैं। जाहिर है इससे कैश रखने की समस्या तो लगभग खत्म हो चुकी है क्योंकि ई-रिक्शे में कहीं जाना हो या फिर मॉल से कोई सामान खरीदना हो आप आराम से यूपीआई कर सकते हैं।
 

यूपीआई से पेमेंट आप सिर्फ अपने देश में ही नहीं बल्कि विदेश में तक कर सकते हैं। भारत का यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस अब ग्लोबल होने की तरफ बढ़ चुका है। इसका जीता जागता उदाहरण है फ्रांस, सिंगापुर, यूएई, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मॉरिशस। इन देशों में आप यूपीआई सिस्टम का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

यूपीआई कैसे भारतीय लोगों को पसंद आने लगा है इसे आप एक आंकड़े से समझ सकते हैं। दिसंबर 2023 में यूपीआई से 18.23 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड लेन-देन हुआ था, जो साल 2022 की समान अवधि की तुलना से 54 फीसदी अधिक था।

विज्ञापन

15 अगस्त 2024: भारत के लगभग हर दूसरे व्यक्ति के पास स्मार्टफोन है। - फोटो : istock

लैंडलाइन से मोबाइल तक

वो समय तो आपको याद होगा जब एक कॉल करने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगानी पड़ती थी और कॉल का शुल्क इतना ज्यादा होता था कि हर कोई कॉल भी नहीं कर पाता था। वहीं, अगर जिसके घर में लैंडलाइन होता था उसे उस समय का अमीर व्यक्ति माना जाता था। इसके बाद आजाद भारत ने तकनीक की सीढ़ियां चढ़ी और आज हम लैंडलाइन से होते हुए मोबाइल ही नहीं बल्कि स्मार्टफोन पर आ चुके हैं।

भारत में मोबाइल हैंडसेट का इस्तेमाल पहली बार जुलाई 1995 में हुआ था, लेकिन मौजूदा समय में लगभग हर कोई स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है। इससे न सिर्फ कॉल करना आसान हो गया बल्कि, इंटरनेट की मदद से हर किसी से संपर्क करने के अलावा अन्य काम करने भी बेहद आसान हो गए।

विज्ञापन

15 अगस्त 2024: शहरों से लेकर दूर-दराज गांवों के लोग भी कंप्यूटर से किसी न किसी रूप में जुड़े हैं। - फोटो : istock

कंप्यूटर ने बदल दिया काम करने का तरीका

आजाद भारत ने कंप्यूटर की डोर ऐसी पकड़ी की आज पूरा देश इससे कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों से लेकर बैंकिंग सिस्टम और लगभग हर एक काम कंप्यूटर/लैपटॉप पर ही हो रहा है। भला कोई भारतीय इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट जो कि कोलकाता में स्थित है को कैसे भूल सकता है क्योंकि भारत में कंप्यूटर की शुरुआत ही यही से हुई थी।

वर्ष 1955 के आखिर में इसे यहां पर लगाया गया था जो कि देश का पहला कंप्यूटर था। इसे बड़ी कामयाबी के तौर पर इसलिए भी देखा गया क्योंकि आजादी के सिर्फ 8 सालों के भीतर ही देश को उसका पहला कंप्यूटर मिल चुका था। हालांकि, उस वक्त इस कंप्यूटर को सिर्फ इंस्टूट्यूट के रिसर्चर ही इस्तेमाल करते थे। इस कंप्यूटर का नाम एचइसी-2एम था जिसे आजकल के कंप्यूटर-लैपटॉप की तरह किसी टेबल पर रखकर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था।

इसके बाद कंप्यूटर को आम आदमी की पहुंच तक पहुंचाने की जरूरत थी जिसका श्रेय उस वक्त के प्रधानमंत्री राजीव गांधी को दिया जाता है। हर घर कंप्यूटर पहुंच सके इसके लिए कंप्यूटर से सरकार का नियंत्रण हटाया गया और इसके बाद पूरी तरह से एसेंबल किए हुए कंप्यूटर को देश में आयात किया गया।

फिर वर्ष 1991 में तेजी आई और सरकार की मदद से प्राइवेट सेक्टर कंपनियों ने सॉफ्टवेयर डेवलप करना शुरू किया और आज हम देख सकते हैं कि लगभग सभी के पास अपना कंप्यूटर-लैपटॉप है।

डिजिटल क्रांति से आगे बढ़कर एआई की ओर रुख करता हिंदुस्तान आज तकनीक के नए आयाम में प्रवेश करने जा रहा है। एआई से शिक्षा, चिकित्सा, रक्षा, अनुसंधान से लेकर बिजनेस, वित्त और व्यवस्था के हर क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। आज भारत सरकार जिस तरह से तकनीकी अनुसंधान को बढ़ावा दे रही है और टेक्नॉलॉजी की चुनौतियों को स्वीकार कर आगे बढ़ रही है इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारत आने वाले समय में वैश्विक व्यवस्था में एक प्रमुख आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरेगा। 

आज स्वतंत्रता दिवस की  78वीं वर्षगांठ पर हिंदुस्तान एक नई शक्ति के रूप में दुनिया के सामने है। आजाद होते भारत के पास जहां अपार जनशक्ति है वहीं दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है। यह एक ऐसी शक्ति है जो तकनीकी रूप से जितनी संपन्न है उतनी ही पूरे विश्व को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। 

आने वाला समय यदि तकनीक का है तो भारत उस तकनीक का सिरमौर होगा।  

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें