15 अगस्त 2024: भारत के लगभग हर दूसरे व्यक्ति के पास स्मार्टफोन है।
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लैंडलाइन से मोबाइल तक
वो समय तो आपको याद होगा जब एक कॉल करने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगानी पड़ती थी और कॉल का शुल्क इतना ज्यादा होता था कि हर कोई कॉल भी नहीं कर पाता था। वहीं, अगर जिसके घर में लैंडलाइन होता था उसे उस समय का अमीर व्यक्ति माना जाता था। इसके बाद आजाद भारत ने तकनीक की सीढ़ियां चढ़ी और आज हम लैंडलाइन से होते हुए मोबाइल ही नहीं बल्कि स्मार्टफोन पर आ चुके हैं।
भारत में मोबाइल हैंडसेट का इस्तेमाल पहली बार जुलाई 1995 में हुआ था, लेकिन मौजूदा समय में लगभग हर कोई स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है। इससे न सिर्फ कॉल करना आसान हो गया बल्कि, इंटरनेट की मदद से हर किसी से संपर्क करने के अलावा अन्य काम करने भी बेहद आसान हो गए।
15 अगस्त 2024: शहरों से लेकर दूर-दराज गांवों के लोग भी कंप्यूटर से किसी न किसी रूप में जुड़े हैं।
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कंप्यूटर ने बदल दिया काम करने का तरीका
आजाद भारत ने कंप्यूटर की डोर ऐसी पकड़ी की आज पूरा देश इससे कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों से लेकर बैंकिंग सिस्टम और लगभग हर एक काम कंप्यूटर/लैपटॉप पर ही हो रहा है। भला कोई भारतीय इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट जो कि कोलकाता में स्थित है को कैसे भूल सकता है क्योंकि भारत में कंप्यूटर की शुरुआत ही यही से हुई थी।
वर्ष 1955 के आखिर में इसे यहां पर लगाया गया था जो कि देश का पहला कंप्यूटर था। इसे बड़ी कामयाबी के तौर पर इसलिए भी देखा गया क्योंकि आजादी के सिर्फ 8 सालों के भीतर ही देश को उसका पहला कंप्यूटर मिल चुका था। हालांकि, उस वक्त इस कंप्यूटर को सिर्फ इंस्टूट्यूट के रिसर्चर ही इस्तेमाल करते थे। इस कंप्यूटर का नाम एचइसी-2एम था जिसे आजकल के कंप्यूटर-लैपटॉप की तरह किसी टेबल पर रखकर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था।
इसके बाद कंप्यूटर को आम आदमी की पहुंच तक पहुंचाने की जरूरत थी जिसका श्रेय उस वक्त के प्रधानमंत्री राजीव गांधी को दिया जाता है। हर घर कंप्यूटर पहुंच सके इसके लिए कंप्यूटर से सरकार का नियंत्रण हटाया गया और इसके बाद पूरी तरह से एसेंबल किए हुए कंप्यूटर को देश में आयात किया गया।
फिर वर्ष 1991 में तेजी आई और सरकार की मदद से प्राइवेट सेक्टर कंपनियों ने सॉफ्टवेयर डेवलप करना शुरू किया और आज हम देख सकते हैं कि लगभग सभी के पास अपना कंप्यूटर-लैपटॉप है।
डिजिटल क्रांति से आगे बढ़कर एआई की ओर रुख करता हिंदुस्तान आज तकनीक के नए आयाम में प्रवेश करने जा रहा है। एआई से शिक्षा, चिकित्सा, रक्षा, अनुसंधान से लेकर बिजनेस, वित्त और व्यवस्था के हर क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। आज भारत सरकार जिस तरह से तकनीकी अनुसंधान को बढ़ावा दे रही है और टेक्नॉलॉजी की चुनौतियों को स्वीकार कर आगे बढ़ रही है इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारत आने वाले समय में वैश्विक व्यवस्था में एक प्रमुख आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरेगा।
आज स्वतंत्रता दिवस की 78वीं वर्षगांठ पर हिंदुस्तान एक नई शक्ति के रूप में दुनिया के सामने है। आजाद होते भारत के पास जहां अपार जनशक्ति है वहीं दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है। यह एक ऐसी शक्ति है जो तकनीकी रूप से जितनी संपन्न है उतनी ही पूरे विश्व को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।
आने वाला समय यदि तकनीक का है तो भारत उस तकनीक का सिरमौर होगा।
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