विश्व सिनेमा का इतिहास
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विश्व में नाम कमाने के बावजूद सेनेगल की सिनेमा की मुख्य समस्या है, उसके अपने दर्शकों का कम होना। असल में जो कला फिल्में विदेशी आर्थिक सहायता से बनती हैं, जिसके निर्माण में विदेशी दृष्टिकोण का दखल होता है वे अक्सर विदेशी दर्शकों को लुभाने का प्रयास अधिक करती हैं। नतीजा होता है, ये खास तरह की फिल्में देशी दर्शकों को नहीं भाती हैं। इसी कारण देश के भीतर इससे अधिक लाभ नहीं होता है।
दर्शक मेनस्ट्रीम की फिल्म देखना चाहता है, उन्हें इससे पैसा वसूल की अनुभूति होती है। उन्हें नेशनल प्रोडक्शन की फिल्मों में उतना मजा नहीं आता है।
सत्तर का दशक स्वर्ण-काल
सेनेगल सिने-इतिहास में पिछली सदी का सत्तर का दशक स्वर्ण-काल माना जाता है। इस समय राजधानी डकर में ही 37 सिनेमा हाल थे। डकर मेट्रोपोलिटन शहर है और खूब जीवंत है। मगर सरकार ने डकर से हट कर राजधानी बनाने की घोषणा की है। इसी डकर में कुछ समय पहले सैन्गारे ने एक फिल्म स्कूल खोला है। उन्होंने एक मिनी सिरीज भी बनाई।
इसी समय क्लासिकल फिल्म बनाने वाले जिब्रील डियोपी मेम्बेटी का उदय हुआ। 23 जनवरी 1945 को जन्मे इस निर्देशक का फेफड़े के कैंसर से 23 जुलाई 1998 में निधन हो गया। उन्होंने 1973 में ‘टुक्की बुक्की’ बनाई जिसमें दिखाया गया है कि एक चरवाहा मोरी तथा यूनिवर्सिटी छात्रा अन्ता पैसे बनाना चाहते हैं, ताकि वे अपना अतीत पीछे छोड़ कर पेरिस जा सकें।
इस फिल्म के लिए जिब्रील डियोपी मेम्बेटी को मास्को इंटरनेशनल फिल्म समारोह में दो पुरस्कार प्राप्त हुए। इसके अलावा उन्होंने ‘हायनाज’, ‘द लिटिल गर्ल हू सोल्ड द सन’, ‘बैडोउ बॉय’ आदि फिल्में बनाई। ‘बैडोउ बॉय’ (1970) एक कॉमेडी फिल्म है, मगर अस्सी के दशक में सरकार को इंटरनेशनल मोनिटरी फंड के दबाव के कारण फिल्म उद्योग का बजट कम करना पड़ा जिसके चलते सेनेगल ही नहीं तमाम अफ्रीकी देशों का फिल्म उद्योग प्रभावित हुआ।
डकर में जन्मी सैफी फाये (1943-2023) ने ‘लेटर फ्रॉम माई विलेज’ (1976), ‘फैद’जैल’ (1979), ‘मोसाने’ (1996) में बनाई। वे निर्देशन के अलावा अभिनय भी करती थीं। उन्हें बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म समारोह में तीन एवं लुकास– इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ फिल्म्स फॉर चिल्ड्रेन एंड यंग पिपुल का एक मतलब कुल चार पुरस्कार प्राप्त हुए थे।
इक्कीसवीं सदी का सिनेमा
इसके बावजूद इक्कीसवीं सदी में सेनेगल का सिनेमा दुनिया का ध्यान खींच रहा है। सरकार द फिल्म एंड ऑडियोविजुअल इंडस्ट्री प्रमोशन फंड द्वारा आजकल छोटे स्केल के प्रोजेक्ट को आर्थिक सहायता दे रही है। 2017 के बर्लिन फिल्म समारोह में अलान गोमिस की फिल्म ‘फेलिसाइट’ को सिल्वर बेयर ग्रैंड ज्यूरी प्राइज मिला। 2019 में मैटी डिओप की फिल्म ‘एटलांटिस’ को कान फिल्म समारोह में ग्रैंड प्री प्राप्त हुआ। मैटी डिओप पहली अश्वेत स्त्री निर्देशक थीं जिसकी फिल्म इस समारोह की प्रतियोगिता में शामिल हुई थी।
पेरिस में जन्मे उस्मान विलियम एम्बाइए ने 2009 में अपनी मां एनेट एम्बाइए पर एक डॉक्यूमेंट्री ‘मेरे-बी’ (मदर-बी) बनाई। उनकी मां लेखक तथा सेनेगल की पहली पत्रकार थीं। उन्होंने स्त्री अधिकारों के लिए आवाज उठाई थी। एक लम्बी उम्र (82 साल) पाई यह स्त्री आज भी सेनेगल के लोगों केलिए एक प्रेरणा है।
आशा है, जल्द ही सेनेगल से हमें कुछ और अच्छी फिल्म देखने को मिलेंगी।
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