केंद्र सरकार ने मणिपुर के कुकी बहुल पर्वतीय इलाकों में विवादास्पद अफस्पा कानून की मियाद छह महीने के लिए बढ़ा दी है।
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राज्य में इंटरनेट सेवाएं बंद हैं। इसके कारण राज्य में आम लोगों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की सरकार ने फिलहाल यह पाबंदी 21 अक्तूबर तक बढ़ा दी है। बीरेन सिंह ने भरोसा दिया है कि चार-पांच दिनों में यह पाबंदी हटा ली जाएगी लेकिन इंटरनेट से पाबंदी हटाने का सरकार का अनुभव अच्छा नहीं रहा है।
हालात सामान्य होते देख कर सरकार ने महीनों बाद बीते महीने इंटरनेट पर लगी पाबंदी हटा ली थी लेकिन उसके दो दिन बाद 25 सितंबर को ही 20 साल के एक युवक और 17 साल की एक युवती के शवों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इंफाल के रहने वाले इन दोनों छात्रों को आखिरी बार छह जुलाई को एक साथ देखा गया था। इस वीडियो के सामने आते ही छात्र और युवक उबल पड़े और राज्य में नए सिरे से हिंसा भड़क गई थी।
हालात बिगड़ते देख कर केंद्र सरकार ने श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश बलवाल को तुरंत मणिपुर भेज दिया। बलवाल का तबादला मणिपुर कैडर में कर दिया गया है। पुलवामा हमले की जांच उनके ही नेतृत्व में हुई थी।
केंद्र सरकार ने मणिपुर के कुकी बहुल पर्वतीय इलाकों में विवादास्पद अफस्पा कानून की मियाद छह महीने के लिए बढ़ा दी है। उसकी दलील है कि इसके नहीं होने से उग्रवादी विरोधी अभियान प्रभावित होगा। लेकिन सरकार के इस फैसले ने कुकी समेत तमाम आदिवासियों की नाराजगी की आग में घी डालने का काम किया है। आदिवासियों के संगठन जोमी काउंसिल ने सरकार के इस फैसले के प्रति कड़ा विरोध जताया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजे एक ज्ञापन में संगठन ने इसे एक पक्षपाती और भेदभावपूर्ण कदम बताया है।
राजनीतिक पर्यवेक्षक के. निपामाचा कहते हैं कि सरकार के पास शायद मौजूदा समस्या के समाधान की कोई ठोस नीति नहीं है। केंद्र सरकार को शायद इस समस्या पर काबू पाने का कोई ठोस उपाय नहीं सूझ रहा है या फिर शायद वह सोच रही है कि चुप्पी साधे रहने से यह समस्या खुद ब खुद हल हो जाएगी। मौजूदा हालात में मणिपुर में परिस्थिति सामान्य होने की उम्मीद कम ही है।
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