विश्व सिनेमा का इतिहास
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स्क्रीनप्ले सहभागिता का सहयोग का कार्य है। फिल्म बनने की प्रक्रिया टीम का प्रयास होता है। स्क्रीनराइटर ठीक वही नहीं कर सकता है जो वह चाहता है, उसे दूसरों की बात भी सुननी होती है, माननी होती है। स्क्रीनप्ले राइटिंग तथा उपन्यास या कहानी लेखन बहुत भिन्न हैं। कहानी या उपन्यास लिखते समय लिखने वाला सृजनकर्ता होता है, भगवान के समकक्ष होता है।
वो जो चाहे कर सकता है, उसके और उसके लेखन के बीच कोई और नहीं होता है, मगर स्क्रीनप्ले राइटिंग इस सबसे अलग होता है। यहां समझौते करने होते हैं। फिल्म बनाने में कई ऐसे तत्व होते हैं, जो लेखक के क्षेत्र के बाहर होते हैं। उसे कई और लोगों के साथ मिल कर चलना होता है।
उनके स्क्रीनप्ले लेखन की शुरुआत ‘द बिग स्लीप’ से हुई, मगर वे ज्यादा जानी जाती हैं, फिल्म ‘स्टार वार्स: एपिसोड V– दि एम्पायर स्ट्राइक्स बैक’ के लिए। हालांकि यह फिल्म उनके जाने के बाद 1980 में बनी। ली ब्रैकेट 1978 में कैंसर से गुजर गईं। उनकी मृत्यु कैलिफोर्निया में हुई। चूंकि वे इसका केवल पहला ड्राफ्ट ही लिख पाई थीं, अत: जॉर्ज लुकास ने इसे फिर से लिखा और स्क्रीनप्ले समाप्त करने केलिए, अंतिम स्वरूप देने केलिए लुकास ने लॉरेंस कैसडन को भी साथ लिया।
ऑस्कर विजेता फिल्म
दो घंटे से कुछ ऊपर की इस एडवेंचर, ड्रामा, फैंटसी फिल्म में दि एम्पायर के विद्रोहियों पर कब्जे के बाद की कहानी है। इस कड़ी का निर्देशन इर्विन केर्शनर ने किया है। इसमें ली के ड्राफ्ट का बहुत कम बचा है, लेकिन क्रेडिट में स्क्रीनप्ले के लिए ली ब्रैकेट के साथ लॉरेंस कैसडन, जॉर्ज लुकास के नाम आते हैं। यह उनका अंतिम स्क्रीनप्ले था।
फिल्म को ढेर सारे पुरस्कारों के साथ ऑस्कर भी मिला। मार्क हैमिल तथा हैरिसन फोर्ट इस फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में हैं। उन्होंने कई बार रे ब्रैडबरी के साथ काम किया। इसके पहले ली ब्रैकेट ने रेमंड शैन्डलर के साथ मिल कर 1973 की फिल्म ‘द लॉन्ग गुडबॉय’ का स्क्रीन्प्ले लिखा था। करीब दो घंटे की यह फिल्म कॉमेडी, क्राइम तथा ड्रामा का मिश्रण है।
यहां भी प्राइवेट डिडेक्टिव फिलिप मार्लो है, जो एक दोस्त की सहायता करने के चक्कर में खुद ही उसकी पत्नी की हत्या में फंस जाता है। दो पुरस्कार प्राप्त इस फिल्म का निर्देशन रॉबर्ट एल्टमैन ने किया है और एलिओट गौल्ड, नीना वान पैलान्ट अभिनेता हैं।
फिक्शन लिखनी में ब्रैकेट की अलग ही पहचान
ली ब्रैकेट का जलवा ऐसा था कि जॉन कारपेंटर की हॉरर फिल्म ‘हैलोवीन’ (1978) में एक चरित्र का नाम ली ब्रैकेट के नाम पर शेरिफ ली ब्रैकेट रखा गया था। चूंकि उनका पूरा नाम ली डगलस ब्रैकेट था अत: शुरुआत में बहुत सारे लोग सोचते थे कि वे एक पुरुष हैं। स्त्री का साइंस फिक्शन लिखना वैसे भी लोगों के गले नहीं उतरता है। इतना ही नहीं निर्देशक हॉवर्ड हाक्स तो मानते थे वह अच्छी लेखक हैं क्योंकि वे ‘एक पुरुष’ की तरह लिखती हैं। अब इन बातों का क्या उत्तर दिया जाए।
अपने काम को रस लेकर करने वाली ली ब्रैकेट ने टीवी के लिए ‘द रॉकफोर्ड फाइल्स’ की स्क्रिप्ट लिखी क्योंकि स्क्रीनप्ले राइटिंग कला से अधिक तकनीकि है अत: यह उनके लिए सदा चुनौती रहा। ‘टेरर आउट ऑफ स्पेस’, ‘द ड्रैगन-क्वीन ऑफ जुपीटर’, ‘क्यूब फ्रॉम स्पेस’, ‘ए वर्ल्ड इज बोर्न’, ‘द डीमन्स ऑफ डार्कनेस’ आदि उनके साइंस फिक्शन के नाम हैं। उन्होंने कई लेख भी लिखे।
ली ब्रैकेट के लेखन का रूसी, जर्मन, फ्रैंच, डच, इटैलियन, चेक, जापानी, स्पेनिश, डैनिश, तुर्की आदि भाषाओं में अनुवाद हुआ है। उपरोक्त वर्णित फिल्मों के अलावा उन्होंने ‘रिओ ब्रैवो’, ‘एल डोरैडो’, ‘हैटारी! आदि फिल्मों के स्क्रीनप्ले भी लिखे।
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