अपनी जान की परवाह किये बिना देश की रक्षा और देश मे रह रहे उन करोड़ों लोगों की रक्षा, जिन्हें वे फौजी जानते भी नहीं।
- फोटो : प्रयागराज
अपनी जान की परवाह किये बिना देश की रक्षा और देश मे रह रहे उन करोड़ों लोगों की रक्षा, जिन्हें वे फौजी जानते भी नहीं। ये भावना सिर्फ एक सच्चे फौजी में ही हो सकती है। उस एक दिन ने हम सबके मन में फौजियों के लिए बनी जगह को और भी खास बना दिया।
फौज में रहने वाला हर व्यक्ति भी इंसान ही होता है, उनके भी परिवार होते हैं और आपकी-हमारी तरह वे भी तीज-त्योहार पर साथ बैठकर मिठाई खाना और जश्न मनाना पसंद करते हैं। लेकिन इन सबसे ऊपर उनके लिए अपना देश होता है। देश जो हम सबकी भी जिम्मेदारी है लेकिन हम जिसे 15 अगस्त और 26 जनवरी की छुट्टी तक सीमित रखते हैं, तो सीमा पर तैनात उन सैनिकों को भी ये भरोसा दिलाइये कि देश के भीतर हम जिम्मेदार नागरिक बनकर रहेंगे। आप निश्चिन्त होकर सीमा सम्भालिए।
आज जनरल बिपिन रावत का फोटो लगभग हर भारतवासी के सोशल मीडिया स्टेटस में लगा हुआ है। उनके लिये पूरा देश गमगीन है। बस इस भावना को बनाये रखना है। देश की रक्षा के लिए जो अपने प्राणों का बलिदान दे रहे हैं उन्हें भरोसा दिलाना है कि भले ही सीमा पर हम आपके साथ नहीं हैं लेकिन हर पल हमारे आशीर्वाद और शुभकामनाएं आपके और आपके परिवार के साथ रहेंगी। सच्चे मन से दुआ कीजिये कि अब भी बहादुरी से डटे ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह को आप सबके आशीष और दुआओं का फल मिले और वे एकदम स्वस्थ होकर घर आएं।
गोरखा राइफल्स का युद्धघोष है 'जय मां काली, आयो गोरखाली', और यकीन मानिए देश को जब भी हिम्मत की जरूरत होगी, हवा में ये युद्धघोष गूंजता सुनाई देगा क्योंकि हमारे असली हीरो बादलों के पार से कमांड दे रहे होंगे।
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