कांग्रेस के लिए हर दिन बढ़ती नई चुनौतियां
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लगते रहे हैं मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप
मोदी अपने भाषणों और बयानों के लिए काफी चर्चा में रहे थे। भारत की राजनीति हिंदू-मुस्लिम वोटों के इर्द गिर्द रही थी। कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप पहले ही लगते रहे और रही सही कसर अन्ना के भ्रष्टाचार के लिए किए गए आंदोलन ने पूरी कर दी। इसके बाद तो जैसे कांग्रेस को उबरने का मौका ही नहीं मिला। लेकिन राज्यों की राजनीति में कांग्रेस का दबदबा बना रहा।
आज यदि देश के ज्यादातर हिस्सों में देखा जाए तो कांग्रेस ही बीजेपी के विकल्प के तौर पर दिखाई देती है। यही वजह है कि राहुल के दौड़ से लगभग बाहर हो जाने के बावजूद वे ही प्रधानमंत्री मोदी और अन्य विपक्षी दलों के निशाने पर रहते हैं।
कांग्रेस में ऐसा नहीं है कि नेताओं की कमी है लेकिन जो सर्वमान्य हो ऐसा कोई नेता नहीं दिखता। उदाहरण के लिए क्या गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, कमलनाथ, अशोक गहलोत, सचिन पायलट, मनीष तिवारी या जी 23 के नाम से मशहूर कांग्रेस के अन्य नेताओं के ग्रुप में कोई भी देश की राजनीति का विकल्प दिखता है?
निश्चित तौर पर राहुल और प्रियंका के समकक्ष नहीं। ये बात सिर्फ राहुल प्रियंका की मर्जी की नहीं है। मर्जी से न उनके पिता आए ना उनकी मां, और कुछ यही स्थिति इन दोनों भाई-बहनों की भी रही है। ये मजबूरी कांग्रेस की है और आज भी इसे तमाम नेता जानते हैं। इसकी एक बड़ी वजह ये भी रही है कि कभी सेंकड लाइन को पनपने का मौका ही नहीं मिला और पी वी नरसिंहा राव के समय जब मिला भी तो गहरे असंतोष का भाव पूरी कांग्रेस में दिखा।
कैसा होगा कांग्रेस का भविष्य?
कुल मिलाकर यदि कांग्रेस के पास हाल फिलहाल में कोई विकल्प दिखता है तो वो गांधी परिवार ही है या फिर पूरी पार्टी को नए सिरे से अपने नए नेतृत्व तलाशने और उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय करने का प्रयास करना पड़ेगा। बहुत तेजी से कांग्रेस से अलग हुईं ममता बनर्जी ने ये साबित भी करके दिखाया है कि कांग्रेस में कितने कद्दावर नेता हैं। इसलिए ये कहना भी गलत होगा कि कांग्रेस का कोई नेता बड़ा चेहरा नहीं बन सकता।
अरविंद केजरीवाल ने भी वैकल्पिक राजनीति की बात कहकर कांग्रेस से असंतुष्ट वोटर्स को अपने साथ जोड़ने का काम किया है और इसका परिणाम उन्हें पहले दिल्ली और फिर पंजाब में मिला है। इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि यदि जल्द ही कांग्रेस में बड़े परिवर्तन नहीं हुए तो कांग्रेस मुक्त भारत का बीजेपी का सपना सच भी हो सकता है।
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