होली सुरता पर देवत्व के विजय का पर्व है। यह हमें बारंबार नकारात्मकता को छोड़ सकारात्मकता को अपनाते हुए उसके संग उत्सव मनाने का संदेश देती है। भारत इतना बड़ा देश है कि यहां हर चीज में विविधता है। खाने-पीने से लेकर पहनने-ओढ़ने तक में यह विविधता साफ झलकती है। इस विविधता में भी हर त्यौहार में खास संदेश लिया रहता है, वह देश के हर कोने में स्पष्ट नजर आता है।
बात करें होली की तो यह देश के हर हिस्से में अलग-अलग ढंग से मनाई जाती है। चाहे बृज के बरसाने वाली लट्ठमार होली तो विश्व प्रसिद्ध है। वहीं हरियाणा की धुलंडी, जहां भाभी द्वारा देवर को सताए चिढ़ाए जाने की प्रथा है। बंगाल में यह दोल यात्रा के रूप में मनाई जाती है, जो कि होली के एक दिन पूर्व से प्रारंभ होता है और महिलाएं पारंपरिक सफेद साड़ी पहनकर राधा कृष्ण की पूजा करती हैं। महाराष्ट्र में यह रंग पंचमी के नाम से जाना जाता है, तो पंजाब में मोहल्ला से पूरा बल्ले-बल्ले करता नजर आता है तो बिहार पहुंचकर पूरे विश्व को फगुआ के फगुनाहट से सराबोर कर देती है।
इस तरह होली के दिन पूरा भारत खुशियों के रंगों में सराबोर होने वाला है। एक दूसरे को गुलाल लगाकर मन का गुबार हटाते हुए समाज में भाईचारा कायम करने वाला है। आप सभी को होली की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ कहना चाहूंगा कि "राधा के रंग और कन्हैया की पिचकारी, प्यार के रंग से रंग दो दुनिया सारी, रंग न जाने कोई मजहब न कोई बोली, मुबारक हो आपको खुशियों भरी होली।
--------------------------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।