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लॉकडाउन और व्यंग्य: 'राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला'

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कोरोना वायरस ने जीवन शैली ही बदल दी। - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना वायरस का इस दुनिया में अवतरण क्या हुआ, एक नए प्रकार की जीवनशैली का आगाज़ देश दुनिया में हो चुका है। स्वयं हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कोरोना संकट के बीच, जब देश में लॉकडाउनीय काल चल रहा है, कारोबार व नई जीवनशैली के नवीन मॉडल का आह्वान किया है।

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अर्थव्यवस्था को लेकर, बेरोजगारी को लेकर देश दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है। वहीं चीन अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ ज्यादा ही आश्वस्त है। अमेरिका को भी अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ ज्यादा ही चिंता है, यही कारण है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जी को यह कहना पड़ा कि यदि देश में लॉकडाउन किया जाता है तो उनका देश अर्थव्यवस्था के मामले में डूब जाएगा। अजी, हम तो कहते हैं कि जब आदमी ही नहीं रहेंगे तो अर्थव्यवस्था को चाटना थोड़े ही है जी? 

माना कि आपके लिए ही नहीं सभी के लिए अर्थव्यवस्था बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण है, लेकिन इतनी भी महत्वपूर्ण नहीं कि इसे जनता की जान से भी अधिक महत्वपूर्ण समझा जाए। खैर, जो भी हो इस कोरोना काल में, लॉकडाउन के चलते दारूड़ियों (शराबियों) को दारू नसीब नहीं हो पा रही है, गुटखा, खैनी, सिगरेट व तम्बाकू उत्पादों के लिए कुछेक लोग तरस रहे हैं। भैया जी, यह बात हमें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे, वीडियो सीडियो, टिकटॉक फिकटॉक से पता चली। 
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अजी ! हम तो कहते हैं, अपनी जीवनशैली को बदलिए और जरूर बदलिए। 

नशा छोड़ने, छुड़ाने का इससे बेहतर अवसर आपको नहीं मिलेगा जी। खाने-खिलाने को इस दुनिया में भगवान ने बहुत सी चीजें बनाई हैं, फिर ये जहर खाकर अपने जीवन और जीवनशैली को क्यों बर्बाद करने पर तुले हुए हैं? ये कोई अमृत तो है नहीं भैयाजी! अजी, ये सब तो आदत शादत का मसला है जी। 

अब कोई सिगरेट, बीड़ी,तम्बाकू, शराब-वराब बीस-पच्चीस दिन या महीने भर नहीं पीएगा तो हो सकता है कि वह ऐसी बुरी आदतों को छोड़ दे, उसकी जीवनशैली बदल जाए। अब कहने वाले शराब के बारे में यह तर्क दे सकते हैं कि "....नशा शराब में होता तो नाचती बोतल...।" बाजार बंद हैं, दारूड़ियों, तम्बाकू खाने वालों के पास स्टॉक खत्म है। लेकिन खाने पीने वाले बहुत कुछ चोरी छिपे कर रहे हैं। कल टेलीविजन पर एक न्यूज़ चैनल पर ड्रोन से तम्बाकू पैकेट लाते एक वीडियो देखा। विदेशों के भी कई विडियो वायरल हुए हैं, वहां के लोग ड्रोन से बीयर की बोतलें मंगवा रहे हैं। 

 

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खैर, जो भी हो, आदमी की जीवनशैली बदल रही है। नशेड़ियों के आचार व्यवहार में लॉकडाउन के कारण आमूल चूल परिवर्तन आया है। यह ठीक है कि शराब से सरकारों को ठीक ठाक "कर" मिलता है, आजकल बिकती नहीं, इसलिए कारोबारियों के साथ सरकारें भी चिंतित हैं। पर इसमें कोई करें तो क्या करें ? अब यह गलत हो रहा है या सही यह तो हमें पता नहीं, लेकिन जीवनशैली जरूर बदल रही है जी। वो हमारे तोताराम जी का बेटा नए कपड़े, नए जूते, नए फैशन में डूबा रहता था, आजकल लॉकडाउन में उसके सूटेड बूटेड होने, डिओडोरेंट, पाउडर व परफ्यूम छिड़कने की चाहत खत्म हो गई है। वो क्या है कि कहीं जाना जो नहीं है उसे। बेचारा हमारी तरह घोर आध्यात्मिक हो गया है।

पूरे दिन का आधे से ज्यादा समय अध्यात्म में गुजार देता है। अब आप बताएं जी, जीवनशैली में बदलाव आ रहा है कि नहीं? आजकल हम भी घर के पास स्थित बगीचे से कोयल की पहली कूक सुनते हैं, हृदय में मधुरस घोलते हैं, वसुंधरा की गोद में खेलते हैं, नीले आसमां को निहारते हैं, पंछियों के कलरव के मजे लेते हैं, आमोद-प्रमोद करते हैं, प्रकृति का श्रंगार मन की आंखों से निहारते हैं, हमारे अधर मंद मंद समीर से बातें करते हैं, वसंती, पीले,नीले, लाल,बैंगनी रंग के फूल हमारे हृदय में हिंडौले लेते हैं, अध्यात्म का मधु संचित करते हैं, भ्रमरों का गुंजन महसूस करते हैं। घर में ही प्राकृतिक नाद, सुर-ताल सुनते हैं। 

इधर, हमारा चंचल बचपन बच्चों संग खिलखिला उठा हैं। अजी ! यह संसार पल पल बदल रहा है। नए साज सुसज्जित हो रहे हैं। अब आप ही बताइएगा जीवनशैली, जीवन बदल रहा है कि नहीं बदल रहा? जीवनशैली बदलकर आजकल हो गई है मधुशाला हो गई है। आदमी समझे तो मधुशाला, नहीं समझे तो ज्वाला। हरिवंशराय बच्चन जी ने क्या खूब कहा है -
"

मदिरालय जाने को घर से, 
चलता है पीने वाला,

"किस पथ से जाऊं ?" 
असमंजस में है वह भोलाभाला;

अलग-अलग पथ बतलाते सब, 
पर मैं यह बतलाता हूं-

राह पकड़ तू एक चला चल, 
पा जाएगा मधुशाला।

'
अजी ! हमें तो बस इतना ही कहना है। अब आप भी तो हमें बताइएगा जरूर आपकी मधुशाला कहां है?
जय रामजी की।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 
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