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विराट-गंभीर का टकराव: क्रिकेट मैदान पर अग्रेशन तो 'पार्ट ऑफ द गेम' है, यह क्रिकेट प्रेमियों को भी आता है पसंद

सार

क्रिकेट या किसी भी अन्य खेल में मैदान पर खिलाड़ियों का उग्र होना कोई नई या अनोखी बात नहीं है। खिलाड़ी स्वयं भी ऐसे अग्रेशन को पार्ट ऑफ द गेम ही मानते हैं।
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विराट-गंभीर आमने सामने - फोटो : Twitter
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विस्तार
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फिल्म घातक में अमरीश पुरी सनी देओल को कहते हैं,'क्रोध को पालना सीख काशी बेटा', पर क्या खेल के मैदान पर क्रोध को पाला जा सकता है? दरअसल, लखनऊ सुपर जाएंट्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लखनऊ में खेले गए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) मैच के अंत में विराट कोहली और गौतम गंभीर इतने उग्र हो गए कि दोनों में भिड़ंत हो गई। हालांकि, क्रिकेट या किसी भी अन्य खेल में मैदान पर खिलाड़ियों का उग्र होना कोई नई या अनोखी बात नहीं है। खिलाड़ी स्वयं भी ऐसे अग्रेशन को पार्ट ऑफ द गेम ही मानते हैं।

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खेल में जोश, जज्बा, जुनून को पैदा करने का जरिया उग्र व्यवहार या क्रोध बनता है। वैसे, आईपीएल मैनेजमेंट ने आरसीबी के खिलाड़ी विराट कोहली और एलएसजी से जुड़े गौतम गंभीर की 100 प्रतिशत मैच फीस काटी है और दोनों की भिड़ंत की वजह बने एलएसजी के खिलाड़ी नवीन उल हक पर 50 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना लगाया गया है। अच्छी बात यह है कि कोहली और नवीन ने अपनी गलती मान भी ली है। यही क्रिकेट है।

पूर्व में क्रिकेट के मैदान पर क्रोध जताने की कई घटनाएं हुई हैं। लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर से लेकर सौरव गांगुली, हरभजन सिंह, युवराज सिंह, गौतम गंभीर, विराट कोहली की गिनती तो उन खिलाड़ियों में होती है, जो मैदान पर अपनी उग्रता के लिए प्रसिद्ध रहे हैं और काफी हद तक इन्हें क्रिकेट प्रेमियों द्वारा पसंद भी किया जाता है।
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भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर 10 फरवरी 1981 को ऑस्ट्रेलिया के साथ एक टेस्ट मैच के दौरान अंपायर के एलबीडब्ल्यू आउट देने के फैसले और उसके बाद ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों द्वारा उकसाने पर इस कदर नाराज हो गए थे कि पिच से अपने साथी खिलाड़ी चेतन चौहान को लेकर बाउंड्री तक पहुंच गए थे।

सौरव गांगुली को कौन भूल सकता है? उन्हें तो टीम इंडिया में अग्रेशन लाने वाला कप्तान कहा जाता है। इंग्लैंड के खिलाफ 13 जुलाई 2002 को वनडे मैच में उन्होंने भारत की जीत पर लॉर्ड्स स्टेडियम की बालकनी में अपनी शर्ट उतार कर लहरा दी थी।

हरभजन सिंह और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एंड्रयू सायमंड्स के बीच की नोकझोंक तो आज भी क्रिकेट प्रेमियों की स्मृति में ताजा है। सायमंड्स ने वर्ष 2007-08 के एक टेस्ट मैच के दौरान आरोप लगाया था कि हरभजन ने उन्हें मंकी (बंदर) कहा। इसके बाद हरभजन पर तीन टेस्ट मैचों का प्रतिबंध लगा था। उसके बाद कई बार हरभजन ने एंड्रयू सायमंड्स को लेकर मैदान पर अपना अग्रेशन न केवल दिखाया, बल्कि जब भी दोनों मैदान पर साथ दिखे तो चर्चाएं शुरू हो जाती थीं।

कई मैचों के दौरान हरभजन को गुस्से में बल्ला हिलाते या गेंद फेंकते देखा जा सकता था। हरभजन और पाकिस्तानी बॉलर शोएब अख्तर के बीच भिड़ंत को क्रिकेट प्रेमी अक्सर याद करते हैं।

 

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शाहिद अफरीदी और गौतम गंभीर - फोटो : Twitter

गंभीर-अफरीदी की भिड़ंत

भारतीय ओपनर रहे गौतम गंभीर के लिए मैदान पर भिड़ना कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तानी ऑलराउंडर शाहिद अफरीदी हों या विकेटकीपर कामरान अकमल या कोई अन्य पाकिस्तानी खिलाड़ी, गौतम गंभीर हमेशा इन खिलाड़ियों से मैदान पर भिड़े हैं। अफरीदी और गौतम की आपसी नोकझोंक तो आज भी याद की जाती है।

वर्ष 1996 के क्रिकेट वर्ल्डकप में वेंकटेश प्रसाद और पाकिस्तानी बल्लेबाज आमिर सोहेल के बीच की नोकझोंक को कैसे बुलाया जा सकता है? जब वेंकटेश की गेंद पर आमिर सोहेल ने चौका लगाकर उंगली का इशारा दिखाया था और अगली गेंद पर वेंकटेश ने आमिर सोहेल को बोल्ड कर दिया था। उसके बाद वेंकटेश का गुस्सा देखने वाला था।

पहला टी-20 वर्ल्ड कप तो सभी को याद होगा, जब कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में भारत ने इसे जीता था। टूर्नामेंट के दौरान इंग्लैंड के खिलाफ एक मैच में युवराज सिंह की भिड़ंत ऑल राउंडर फ्लिंटॉफ से हो गई। फ्लिंटॉफ के उकसाने पर युवराज इतने गुस्से में आ गए थे कि उन्होंने स्टुअर्ट ब्रॉड के अगले ही ओवर में छह बॉल पर छह छक्के जमा दिए थे।

इसे पॉजिटिव अग्रेशन के रूप में लिया गया था। युवराज सिंह को पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के साथ कई मैचों में मैदान पर क्रोधित होते और अग्रेशन दिखाते देखा जा सकता था। 

विराट कोहली की गिनती भी बेहद अग्रेशिव खिलाड़ियों में होती है और उन्हें मैदान पर चीखते-चिल्लाते हुए खिलाड़ियों में जोश भरते देखा जाता है। हालांकि, लखनऊ में एलएसजी के खिलाफ उनके गुस्से की नींव आरसीबी और एलएसजी के बीच बेंगलुरु में खेले पिछले मैच में पड़ गई थी। जब एलएसजी ने आरसीबी को उसके घर बेंगलुरु में जीते-जीताए मैच को अंतिम गेंद पर हरा दिया था और तब एलएसजी से जुड़े गौतम गंभीर ने अपने अग्रेशन का काफी प्रदर्शन किया था। लखनऊ में उसी का जवाब कोहली दे रहे थे।


कुछ खिलाड़ी बेहद शांति-प्रिय

हालांकि, गुस्सैल खिलाड़ियों के अलावा भारतीय टीम में चंद खिलाड़ी ऐसे भी हुए हैं, जो अपने संयम के लिए जाने जाते हैं। उनमें पहला नाम महेंद्र सिंह धोनी का आता है। इसलिए उन्हें कैप्टन कूल भी कहा जाता है। भारत-पाक मैचों के दौरान जब भी खिलाड़ी आपस में भिड़े तो कैप्टन कूल धोनी ने ही उन्हें शांत कराया और माहौल को बेहद हल्का कर बात खत्म करा दी।

कुछ हद तक सचिन तेंदुलकर भी ऐसे विवादों से दूर रहे हैं। पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ भी बेहद शांत कप्तान रहे हैं। हालांकि, एक-दो अवसरों पर तो उन्होंने भी अपना अग्रेशन दिखाया है। खेल के मैदान पर अग्रेशन अच्छा है, क्योंकि यह खेल का ही एक हिस्सा है, पर खिलाड़ियों को मैदान के बाहर इसे नहीं लेकर जाना चाहिए और हम अक्सर ऐसा देखते भी हैं कि खिलाड़ी मैदान का गुस्सा बाहर नहीं ले जाते।

अग्रेशन नहीं होगा तो फिर खेल कैसा? दिल्ली ब्वॉज कोहली और गौतम के बीच भिड़ंत मैदान पर छूट गई है और क्रिकेट बढ़ गया है।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें। 
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