शाहिद अफरीदी और गौतम गंभीर
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गंभीर-अफरीदी की भिड़ंत
भारतीय ओपनर रहे गौतम गंभीर के लिए मैदान पर भिड़ना कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तानी ऑलराउंडर शाहिद अफरीदी हों या विकेटकीपर कामरान अकमल या कोई अन्य पाकिस्तानी खिलाड़ी, गौतम गंभीर हमेशा इन खिलाड़ियों से मैदान पर भिड़े हैं। अफरीदी और गौतम की आपसी नोकझोंक तो आज भी याद की जाती है।
वर्ष 1996 के क्रिकेट वर्ल्डकप में वेंकटेश प्रसाद और पाकिस्तानी बल्लेबाज आमिर सोहेल के बीच की नोकझोंक को कैसे बुलाया जा सकता है? जब वेंकटेश की गेंद पर आमिर सोहेल ने चौका लगाकर उंगली का इशारा दिखाया था और अगली गेंद पर वेंकटेश ने आमिर सोहेल को बोल्ड कर दिया था। उसके बाद वेंकटेश का गुस्सा देखने वाला था।
पहला टी-20 वर्ल्ड कप तो सभी को याद होगा, जब कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में भारत ने इसे जीता था। टूर्नामेंट के दौरान इंग्लैंड के खिलाफ एक मैच में युवराज सिंह की भिड़ंत ऑल राउंडर फ्लिंटॉफ से हो गई। फ्लिंटॉफ के उकसाने पर युवराज इतने गुस्से में आ गए थे कि उन्होंने स्टुअर्ट ब्रॉड के अगले ही ओवर में छह बॉल पर छह छक्के जमा दिए थे।
इसे पॉजिटिव अग्रेशन के रूप में लिया गया था। युवराज सिंह को पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के साथ कई मैचों में मैदान पर क्रोधित होते और अग्रेशन दिखाते देखा जा सकता था।
विराट कोहली की गिनती भी बेहद अग्रेशिव खिलाड़ियों में होती है और उन्हें मैदान पर चीखते-चिल्लाते हुए खिलाड़ियों में जोश भरते देखा जाता है। हालांकि, लखनऊ में एलएसजी के खिलाफ उनके गुस्से की नींव आरसीबी और एलएसजी के बीच बेंगलुरु में खेले पिछले मैच में पड़ गई थी। जब एलएसजी ने आरसीबी को उसके घर बेंगलुरु में जीते-जीताए मैच को अंतिम गेंद पर हरा दिया था और तब एलएसजी से जुड़े गौतम गंभीर ने अपने अग्रेशन का काफी प्रदर्शन किया था। लखनऊ में उसी का जवाब कोहली दे रहे थे।
कुछ खिलाड़ी बेहद शांति-प्रिय
हालांकि, गुस्सैल खिलाड़ियों के अलावा भारतीय टीम में चंद खिलाड़ी ऐसे भी हुए हैं, जो अपने संयम के लिए जाने जाते हैं। उनमें पहला नाम महेंद्र सिंह धोनी का आता है। इसलिए उन्हें कैप्टन कूल भी कहा जाता है। भारत-पाक मैचों के दौरान जब भी खिलाड़ी आपस में भिड़े तो कैप्टन कूल धोनी ने ही उन्हें शांत कराया और माहौल को बेहद हल्का कर बात खत्म करा दी।
कुछ हद तक सचिन तेंदुलकर भी ऐसे विवादों से दूर रहे हैं। पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ भी बेहद शांत कप्तान रहे हैं। हालांकि, एक-दो अवसरों पर तो उन्होंने भी अपना अग्रेशन दिखाया है। खेल के मैदान पर अग्रेशन अच्छा है, क्योंकि यह खेल का ही एक हिस्सा है, पर खिलाड़ियों को मैदान के बाहर इसे नहीं लेकर जाना चाहिए और हम अक्सर ऐसा देखते भी हैं कि खिलाड़ी मैदान का गुस्सा बाहर नहीं ले जाते।
अग्रेशन नहीं होगा तो फिर खेल कैसा? दिल्ली ब्वॉज कोहली और गौतम के बीच भिड़ंत मैदान पर छूट गई है और क्रिकेट बढ़ गया है।
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