हर पत्ते का एक जीवन चक्र होता है। वह चक्र पूरा होने के बाद वह अपना रूप बदलते हैं।
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पेड़ों से सभी पत्ते एक साथ नहीं गिरते हैं। वह कुछ-कुछ वक्फे के बाद गिरते रहते हैं। ऊंची चोटियों पर काफी ढेर सारे हरे पत्ते बचे रहते हैं। वह भी गिरते हैं। अपना वक्त पूरा करने के बाद वह भी विदा लेते हैं, क्योंकि विदा लेना एक नियम है। यह विदाई बहुत सकारात्मक है। यह एक पॉजिटिव सिस्टम है, ताकि पेड़ों का और अंततः हम सबका और दुनिया का जीवन सौंदर्य बरकरार रहे। पेड़ों की हरियाली कभी न खत्म हो। पेड़ों का जीवन हमेशा बचा रहे। वह बहारें लाते रहें। बंसत में मुस्कुराते रहें.... खिलखिलाते रहें... खुशियां बिखेरते रहें। ऑक्सीजन देते रहें।
हर पत्ते का एक जीवन चक्र होता है। वह चक्र पूरा होने के बाद वह अपना रूप बदलते हैं। हरे से धीरे धीरे पीले और लाल हो जाते हैं। या फिर नारंजी। फिर यह विदा हो जाते हैं अपनी शाखों से। जमीन पर बिखर कर यह उड़ेंगे। यहां वहां फिरेंगे। फिर यह एक बार और अपना रूप बदलेंगे।
यह धीरे धीरे खाद में तब्दील हो जाएंगे। अंत में उन्हीं पेड़ों की जड़ों में समा जाएंगे। फिर उन पेड़ों को नई ऊर्जा देंगे। इस तरह से इस धरती पर कुछ भी नष्ट नहीं होता है। कुछ भी खत्म नहीं होता है। बस सब कुछ अपना रूप बदलता है। इस रूप बदलने में भी एक निरंतरता है। समय का चक्र है... और यह चक्र पूरा करना ही होता है। सभी चीजों को।
पत्ते गिरने के बाद भी पेड़ों का जीवन बचा रहता है। धीरे-धीरे कुछ अंतराल के बाद, इन पेड़ों पर नई-नई हरी कचूर सी कोपलें आ जाएंगी। वह कोपलें धीरे-धीरे अपना आकार बदलती जाएंगी और पेड़ फिर से हरे भरे हो जाएंगे। और इन पत्तों के बीच नए फूल आएंगे। फिर यह फूल फल में तब्दील हो आएंगे।
इस तरह पुराने पत्तों की जगह नए पत्ते और फिर फल आते हैं। यह फल अपने अंदर बीज ले कर आते हैं... और हर बीज एक नया पेड़ पैदा करता है। इस तरह से एक नए जीवन का उदय होता है। यह फल तमाम तरह के पशु-पक्षियों को भोजन और जीवन देता है, इसलिए इन पत्तों का झरना जरूरी है। यह इसलिए झरते भी हैं। सदियों से ऐसा हो रहा है... और जब तक यह सूरज है... तब तक ऐसा होता रहेगा। हजारों-करोड़ों साल तक।
शरद ऋतु से पहले गर्मी का मौसम होता है। गर्मी में पेड़ सूरज की किरणों की मदद से अपने लिए भोजन बनाते हैं।
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कभी इन पत्तों को उठा कर देखिए। यह बहुत शांत और संतुष्ट से नजर आते हैं। यह पेड़ों से जुदा होने के बाद भी अंत में उनके ही काम आते हैं। यही शायद इनकी खुशी भी है कि यह जुदा होकर भी उसमें ही समा जाते हैं। इन पत्तों के झरने के पीछे, जिंदगी का एक और खूबसूरत फलसफा और साइंस है। दरअसल यह पत्ते खुद झर कर पेड़ों को जीवन दान देते हैं।
शरद ऋतु से पहले गर्मी का मौसम होता है। गर्मी में पेड़ सूरज की किरणों की मदद से अपने लिए भोजन बनाते हैं। गर्मी का मौसम खत्म होने पर पेड़ों को अपने लिए भोजन बनाने में दिक्कत होती है, इसलिए वह भोजन को जमा कर के भी रखते हैं। जब शरद ऋतु आती है तो पेड़ों को गर्मी जैसी धूप नहीं मिल पाती है। नतीजे में वह संचय किया गया भोजन इस्तेमाल करने लगते हैं।
इस दौरान पेड़ों का बहुत सारा पानी, पत्तों के छोटे छोटे छेदों से वाष्प की शक्ल में बाहर निकल जाता है। इस से पेड़ों का जमा पानी भी धीरे-धीरे खत्म होने लगता है। नतीजे में पेड़ उस जगह को ब्लॉक कर देते हैं, जहां से पत्तों को पानी जाता है। इस वजह से पत्तों को रसद यानी भोजन और पानी की कमी हो जाती है। फिर वह धीरे-धीरे पीले और लाल होने लगते हैं। फिर वह टूट कर नीचे गिर जाते हैं, लेकिन यह पत्ते झरने से पहले एक महान काम कर जाते हैं।
अपने हिस्से का खाना और पानी दे कर पेड़ों को जिंदा रहने की मदद कर जाते हैं। इस से पेड़ों का जीवन बचा रहता है। और उन में बसंत में फिर से नई कोपलें आ जाती हैं। वह धीरे धीरे हरे भरे हो जाते हैं। सब कुछ फिर से सुंदर और शांत हो जाता है।
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