प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र से खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री पिछले वित्त वर्ष में 1.34 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई।
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खादी की वैश्विक ब्रांडिंग भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और सतत् विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने में मदद करता है। यह खादी उद्योग के लिए भी एक प्रोत्साहन है, जो भारत के ग्रामीण क्षेत्र में लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र से खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री पिछले वित्त वर्ष में 1.34 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई, जबकि इसके माध्यम से 9.54 लाख से अधिक नए रोजगार का सृजन हुआ है।
खादी कपड़ों की बिक्री में पिछले 9 वर्षों में 450 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल और खादी कारीगरों के पारिश्रमिक में 233 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है कि ‘मोदी युग’ में ‘खादी क्रांति’ ने बड़े पैमाने पर भारतीय जनमानस को भीतर तक प्रभावित किया है और अब ‘नए भारत की नई खादी’ वैश्विक मंच पर आत्मनिर्भर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार है।
खादी ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रतीक
खादी हमारी विरासत है। खादी ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रतीक है। खादी हमारी आन-बान और शान है। जी-20 शिखर सम्मेलन में गरीब की खादी विश्व नेताओं की शोभा बनी ये खादी जगत् के लिए अभिमान है।
सम्मेलन के लिए राजधानी दिल्ली को जिस तरह से सजाया संवारा गया, वो नए भारत की तस्वीर है। पूरे कार्यक्रम के दौरान दिल्ली वालों ने जिस तरह से माननीय प्रधानमंत्री जी की अपील पर विदेशी मेहमानों का दिल खोलकर स्वागत किया, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है।
देश के सबसे बड़े कार्यक्रम को सफल बनाने में जनता की ये भागीदारी देश के नेतृत्व पर उनके भरोसे को दर्शाती है। इस आयोजन ने दुनिया भर में ‘हाथ से करते और हाथ से बुने’ खादी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे एक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल वस्त्र के रूप में बढ़ावा देने में मदद की है।
खादी की वैश्विक ब्रांडिंग भारत और दुनिया के लिए सही सही समय पर, सही दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जी-20 में खादी की ग्लोबल ब्रांडिंग के लिए समस्त खादी जगत माननीय प्रधानमंत्री जी का ह्रदय से आभारी है।
नोट: लेखक खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष हैं।
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