हमारे महान गणतंत्र और प्रेरणादायी संविधान का सम्मान कायम रहे और हम नई ऊंचाईयों को छुएं
- फोटो : पेक्सेल्स
26 जनवरी को ठीक आठ बजे परिसर में ही नियुक्त सिपाहियों की ‘सलामी शस्त्र’ के बीच वहां के तत्कालीन उपजिलाधिकारी (एस. डी. एम) द्वारा ध्वजारोहण किया गया और मैंने पहली बार सैकड़ों लोगों के सामने खड़े होकर माइक पर अपने स्कूल यूनिफार्म में राष्ट्रगान गाया।
ध्वजारोहण के उपरांत समारोह में उपस्थित सभी लोग कार्यालय परिसर के भीतर बने झंडियों से आच्छादित एक वृहत हॉल में दरी के ऊपर बिछी साफ-सफेद चादर पर जाकर बैठ गए। धीर-गंभीर एस. डी. एम. साहब ने सभा को संबोधित किया और फिर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ एक प्रतिभागी समूह के कीर्तन द्वारा किया गया। कीर्तन समाप्त होने के तुरंत बाद कार्यक्रम के संचालक ने घोषणा की, “अब आप सबको हमारे कैंपस के ‘नेताजी ’ एक गीत सुनाएंगे।“
फिर तालियों के बीच उठकर मैं मंच तक पहुंचा। मेरे लिए माइक की हाईट एडजस्ट की गई और मैंने एक्शन के साथ ‘नन्हा मुन्ना राही हूं ’ गीत सबको ‘ दाहिने बाएं दाहिने बाएं ’ बुलंद आवाज में कहते हुए कदम- ताल करते हुए सुनाया।
गीत जैसे ही खत्म हुआ, मंच पर बैठे उपजिलाधिकारी महोदय ने बड़े प्यार से मुझे अपनी ओर बुलाया और बोले, “ भई नेताजी ! आप तो बहुत ही सुंदर और मधुर गाते हैं, पर आपने राष्ट्रगान गाते समय लगता है एक छोटी सी गलती कर दी। ‘जन गण मन’ के अंत में ‘गुड आफ्टरनून’ भला क्यों? ” फिर उन्होंने मुझे समझाया कि राष्ट्रगान तो बस ‘ जय जय हे ’ पर ही समाप्त हो जाता है और ‘ गुड आफ्टरनून ’ विद्यालय से छुट्टी के समय अध्यापक को अलविदा कहने के लिए कहा जाता है।
इसके बाद उन्होंने अपनी उंगली से इशारा करते हुए नाजिर जी को बुलाया और उनको हिदायत दी कि आइंदा जितने भी राष्ट्रीय पर्व उनके यहां होंगे, राष्ट्रगान ‘नेताजी’ ही गाएंगे। फिर उन्होंने मुझे इनाम के तौर पर कुछ रुपये और लड्डू भी दिए। मैं बेहद प्रसन्न था।
उस समारोह के बाद कई वर्षों तक 26 जनवरी और 15 अगस्त का कार्यक्रम आरंभ होने से पूर्व नाजिर जी हमेशा राष्ट्रगान के लिए मुझे बुलाने आते थे और मैं एक विशिष्ठ अतिथि के रूप में वहां पर जाया करता था। इसलिए पूरे वर्ष मुझे इन दो दिनों का बेसब्री से इंतजार रहता था।
बचपन से ही इस प्रकार के कार्यक्रमों में रुचि और नियमित हाजिरी के कारण शुरू से ही अपने राष्ट्रगान के साथ ऐसा जुड़ाव पैदा हुआ कि आज भी जब इस प्यारे गीत की आवाज कानों में कहीं पड़ती है, तो कदम वहीं ठहर जाते हैं, शरीर सावधान मुद्रा में चला जाता है और रोमांचवश आंखों से अश्रु रूपी दो मोती स्वतः ही गिर जाते हैं।
हमारे महान गणतंत्र और प्रेरणादायी संविधान का सम्मान कायम रहे और हम नई ऊंचाईयों को छुएं, इस कामना के साथ भारत के भाग्य विधाता- बच्चों और आप सभी को गणतंत्र दिवस की ढेरों बधाइयां।
(लेखक हैदराबाद स्थित एक आई.टी. व इंजीनियरिंग सर्विसेज कम्पनी में निदेशक व स्तम्भकार हैं )
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