कानपुर। महिला शहरकाजी को गैरशरई और नाजायज बताते हुए मुफ्ती-ए-शहर हनीफ बरकाती ने फतवा जारी किया है। फतवे के मुताबिक कोई महिला आलिमा और मुफ्ती तो बन सकती है, लेकिन शहर काजी का पद उसके लिए नहीं है। पैगंबर-ए-इस्लाम के जमाने में भी ऐसा नहीं हुआ और उसके बाद इस्लाम के चारों इमामों ने औरतों को काजी के पद के लिए नाजायज बताया है। मुफ्ती के मुताबिक अगर किसी औरत को काजी बनाकर उसके फैसले पर अमल कराया गया तो ऐसा करने वाला गुनहगार होगा।
मुफ्ती-ए-शहर से फतवा मांगा गया था कि क्या किसी औरत के काजी बनने के लिए डिग्री की जरूरत है। बिना डिग्री के कोई काजी बन सकता है या नहीं? जवाब में उन्होंने कहा कि शहर काजी तमाम शरई मसलों के अलावा लड़ाई-झगड़े के मामलों में दोनों पक्षों में समझौता या फैसला कराता है। महिला यह काम नहीं कर सकती। पहले सुल्तान या उनका प्रतिनिधि शहर काजी नियुक्त करते थे।
अब उस क्षेत्र का सबसे बड़ा आलिम-ए-दीन शहर काजी नियुक्त करता है। यह फतवा सुन्नी महिला शहर काजी मारिया फजल के लिए दिया गया है। उन्हें आल इंडिया महिला बोर्ड ने काजी मनोनीत किया है। उलेमा की तरफ से हो रहे विरोध के बाद मारिया फजल बैकफुट पर आ गई हैं। उनके मनोनयन के विरोध में मुफ्ती शमीम नूरी और बरेली शरीफ के मौलाना असजद रजा खां भी बयान जारी कर चुके हैं।