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वैट रिफंड घोटाला की जांच सीबीआई से नहीं

Fri, 13 Dec 2013 11:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पंजाब में 500 करोड़ के वैट रिफंड घोटाले की सीबीआई जांच पर रोक लगाए जाने के बीच पंजाब सरकार ने एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग के डिविजनल कमिश्नर की अगुवाई में जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी एक माह में रिपोर्ट देगी।
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पंजाब में वैट रिफंड घोटाला राज्य सरकार की नजर में है और खुद उप मुख्यमंत्री एक समारोह में सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन जांच के लिए कमेटी तब बनी जब पूर्व सेहत मंत्री सतपाल गोसाईं ने विभाग के कमिश्नर से मुलाकात कर उन्हें 52 ऐसी बोगस फर्मों की सूची सौंपी, जिनके जरिए सैकड़ों करोड़ रुपये का वैट रिफंड घोटाले को अंजाम दिया है।

फाइनेंशियल कमिश्नर टैक्सेशन डीपी रेड्डी ने यह मामला संज्ञान में आने के बाद जांच कमेटी का गठन किया है। भाजपा नेता सतपाल गोसाईं ने कमिश्नर को 52 ऐसी बोगस फर्मों की सूची सौंपी है जिसे विभाग के अधिकारियों के नजदीकी रिश्तेदार चला रहे हैं।
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फर्में अधिकारियों के ड्राइवर और गनमैनों के नाम पर चल रही हैं। गोसाई के हलफनामे के मुताबिक विभाग के पांच-छह अधिकारी हैं जो यह बोगस फर्में चला रहे हैं। उन्होंने इन फर्मों के फर्जी टिन नंबर भी दिए हैं जिनके जरिए करोड़ों के वैट रिफंड लिए गए हैं।

उधर, टीम केसदस्य डीईटीसी ऋषिपाल ने बताया कि कमेटी ने जांच शुरू कर दी है और यह मामला बेहद गंभीर है। कमेटी एक माह में जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी।

उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने कहा है कि विभाग में किसी तरह के भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को अब निलंबित नहीं बल्कि सीधे बर्खास्त किया जाएगा।

आश्चर्य की बात है कि विभाग के अधिकारी ही सरकार को चूना लगा रहे हैं जबकि राज्य सरकार उनके खिलाफ जांच या कार्रवाई के बजाय मामले को अभी तक ठंडेे बस्ते में डाल कर बैठी थी।
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