नगर निगम ने शुक्रवार को एनजीटी में शपथ पत्र दाखिल कर कहा है कि कंपनी के साथ प्लांट लगाए जाने के दौरान ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ था कि प्लांट को किसी तरह की टिपिंग फीस दी जाएगी। निगम ने एनजीटी को कहा है कि जनहित में अगर कोर्ट चाहे तो टिपिंग फीस के भुगतान करने पर फैसला कर सकता है। मालूम हो कि पिछले माह जेपी कंपनी ने शहर का कूड़ा प्रोसेस करना बंद कर दिया था। बाद में एनजीटी के निर्देश पर कंपनी ने प्लांट खोला था, लेकिन टिपिंग फीस के मामले में नगर निगम को जवाब देने को कहा था। शुक्रवार को निगम ने शपथ पत्र दाखिल कर यह जवाब दिया है। अब सुनवाई की अगली तारीख 26 अगस्त तय हुई है। जेपी कंपनी ने नगर निगम को कहा है कि उनकी वित्तीय हालत ठीक नहीं है। बिना टिपिंग फीस के प्लांट नहीं चल सकता।
मालूम हो कि नगर निगम ने सदन में पिछले माह 29 जुलाई को तय किया था कि 100 टन कूड़ा प्लांट प्रोसेस नहीं कर रहा है, अगर जेपी कंपनी डड्डूमाजरा के प्लांट को अपग्रेड कर देता है तो निगम उस अतिरिक्त कूड़े को प्रोसेस करने के बदले में टिपिंग फीस देने को तैयार है। मालूम हो कि अभी शहर में रोजाना 350 टन कूड़ा आता है, जिसमें प्लांट 250 टन कूड़ा प्रोेसेस करता है। जबकि 100 टन कूड़ा सीधा डंपिंग ग्राउंड में जाता है। जो कि डड्डूमाजरा के लोगों के लिए दुर्गंध का कारण बना है।