अगर आपकी कार केवल बोलने से दाएं व बाएं मुड़ने के साथ ही आगे-पीछे चलने लगे तो वह कार पूरी तरह से हाईटेक ही कही जाएगी। हालांकि इस पर कम ही विश्वास होता है, लेकिन दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल के छात्रों ने एक ऐसा एंबेडिड सिस्टम बनाने में सफलता हासिल कर ली है। इस सिस्टम को कार में लगाकर उसे डिसेबल्ड फ्रेंडली बनाया जा सकता है और उस कार को दिव्यांग भी चला सकते हैं। ऐसा करने के लिए एंबेडिड सिस्टम में उस इंसान का वॉयस सैंपल फीड करना होगा, जिसको कार चलानी है। इस तरह केवल 3-5 हजार रुपये में तैयार हुए इस सिस्टम से कार पूरी तरह से हाईटेक हो सकती है। यह सिस्टम बनाकर छात्रों ने इसका सफल परीक्षण भी कर लिया है।
छह महीने में मिली सफलता
इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग के प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार दहिया के नेतृत्व में फाइनल ईयर के छात्र तनुज सिंह, आदर्श पंवार, सचिन, योगिता ने एंबेडिड सिस्टम लगभग छह महीने पहले बनाना शुरू किया था। इसको बनाने में शुरुआत में कुछ परेशानी हुई, लेकिन उसमें लगातार सुधार किया गया। इनको अब कामयाबी मिल गई है, क्योंकि एंबेडिड सिस्टम का परीक्षा पूरी तरह से सफल रहा है। यह ऐसा एंबेडिड सिस्टम है, जिसको किसी भी आटोमेटिक कार में लगाने के बाद बोलकर कार को चलाया जा सकता है। अगर कोई कार में सिस्टम लगाकर टर्न लेफ्ट कहता है तो वह बाई ओर मुड़ जाएगी और इस तरह टर्न राइट कहा जाएगा तो वह दायीं ओर मुड़ जाएगी। ऐसे ही आगे चलना, पीछे चलना, रुकना सब कुछ बोलकर किया जा सकता है। अगर कार को ज्यादा मोड़ना है तो हार्ड शब्द का इस्तेमाल करके ज्यादा मोड़ा जा सकता है। जहां सॉफ्ट लेफ्ट या राइट टर्न बोलने से कार 45 प्रतिशत तक मुड़ेगी, वहीं हार्ड लेफ्ट या राइट टर्न बोलने से वह 90 प्रतिशत तक मुड़ जाएगी।
पासवर्ड से डाला जाएगा वॉइस सैंपल
प्रो. दहिया ने बताया कि एंबेडिड सिस्टम में लॉक सिस्टम डाला गया है। उसको अनलॉक करने के बाद ही वॉइस सैंपल डाला जा सकेगा। उस सिस्टम में जिसकी भी वॉइस का सैंपल डाला जाएगा, केवल वही उसको ऑपरेट कर सकता है। उसमें अभी 16 लोगों के वॉइस सैंपल लिए जा सकते हैं, लेकिन इसको मेमोरी के आधार पर बढ़ाया भी जा सकता है। उनके अनुसार अभी यह सिस्टम किसी भी आटोमेटिक कार में लगाने के लिए तैयार किया गया है और कार में लगाने के बाद कोई दिव्यांग व्यक्ति भी इसे चला सकता है। उस दिव्यांग के भले ही हाथ व पैर ना हो, लेकिन वह बस बोल सकता होगा तो कार चला सकेगा।
इस एंबेडिड सिस्टम पर चार छात्रों की टीम ने काम किया है। यह सिस्टम परीक्षण में पूरी तरह से कामयाब हुआ है। पहले रोबोट पर इसका परीक्षण किया गया और उसके बाद कार पर परीक्षण किया। यह दिव्यांगों के लिए काफी बेहतर होगा और इसे जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे इसका फायदा हर किसी को मिल सके।
-डॉ. पवन कुमार दहिया, प्रोफेसर, इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग, दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल।