दिल्ली हाईकोर्ट ने राजद के विवादित नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन की याचिका पर सीबीआई व तिहाड़ जेल प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शहाबुद्दीन ने याचिका दायर कर कहा कि वह फरवरी 2017 से उसे एकांत कारावास में रखा जा रहा है और यह उसके कानूनी अधिकार का उल्लंघन है। इसलिये उसे एकांत कारावास से बाहर निकलवाया जाये।
जस्टिस विपिन सांघी व जस्टिस पीएस तेजी की खंडपीठ ने ने शहाबुद्दीन की याचिका पर नोटिस जारी अगली तारीख पर शहाबुद्दीन को पेश करने का निर्देश दिया है। वह फिलहाल तिहाड़ की जेल नंबर दो में बंद है। कोर्ट ने उसकी उचित सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई के लिये 27 अप्रैल की तारीख तय की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने 45 अपराधिक मामलो में आरोपी शहाबुद्दीन को बिहार की सिवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल भेजने का निर्देश 15 फरवरी 2017 को दिया था। कोर्ट ने कहा था कि किसी को भी मुकदमे की सुनवाई को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इसके बाद उसे 19 फरवरी 2017 को तिहाड़ जेल शिफ्ट कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश पत्रकार राजदेव रंजन की पत्नी आशा रंजन व चंद्रकेश्वर प्रसाद की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया था।
हाईकोर्ट केसमक्ष याचिका दायर कर रूद्रो चैटर्जी ने कहा कि शहाबुद्दीन को बिना अदालती आदेश के एकांत कारावास में रखा जा रहा है। जहां पर उसे रखा गया है वहां पर बाहर से रोशनी नहीं आती साफ सफाई नहीं है। इसके अलावा किसी भी कैदी को लगातार 14 दिनों तक व कुल मिलाकर तीन माह से ज्यादा एकांत कारावास में नहीं रखा जा सकता।