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जर्जर भवनों से मंडरा रहा हादसे का खतरा, नगर परिषद के पास सूची ही नहीं

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फोटो-55: बहादुरगढ़ के मेन बाजार एरिया में जर्जर भवन। संवाद
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बहादुरगढ़। शहर और गांवों में वर्षों पुराने और जर्जर हो चुके भवन हादसों का कारण बन सकते हैं। बहादुरगढ़ की लगभग हर कॉलोनी में एक-दो ऐसे भवन हैं, जो लंबे समय से खाली पड़े हैं और देखरेख के अभाव में खस्ताहाल हो चुके हैं। वहीं गांवों में भी कई पुरानी हवेलियां जर्जर हालत में हैं, जिनमें वर्षों से कोई नहीं रहता। गांव मातन और गांव आसौदा में 10 से ज्यादा पुरानी हवेलियां हैं जो कई सालों से जर्जर हो चुकी हैं। इन हवेलियों में कोई रहता भी नहीं है। ऐसे में ये किसी हादसे का कारण बन सकती हैं।
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नगर परिषद के पास फिलहाल शहर में ऐसे जर्जर और कंडम भवनों की कोई सूची उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अब नगर परिषद ने शहर में सर्वे कराने का निर्णय लिया है। सर्वे के दौरान जर्जर और खतरनाक भवनों को चिन्हित कर उनकी सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद संबंधित भवन मालिकों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संजय रोहिल्ला ने बताया कि सर्वे के दौरान यदि कोई भवन जर्जर और खतरनाक स्थिति में मिलता है तो उसके मालिक को नोटिस देकर भवन को स्वयं गिराने के लिए कहा जाएगा। यदि मालिक निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं करता है तो नगर परिषद नियमानुसार भवन गिराने की कार्रवाई करेगी।
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उन्होंने कहा कि सर्वे का उद्देश्य जर्जर भवनों के कारण होने वाले संभावित हादसों को रोकना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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