नया सेशन शुरू हो चुका है। दो दिन शेष हैं... लेकिन अभी तक स्कूलों ने फीस कमेटी के सामने रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। हालांकि, अभी तक अभिभावकों की कितनी शिकायतें शिक्षा विभाग तक पहुंची है, यह बताने में अधिकारी अपने आप को अक्षम बता रहे हैं। इधर, अभिभावकों का कहना है कि 15 अप्रैल से प्राइवेट स्कूलों में शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और ऐसे में अधिकांश प्राइवेट स्कूलों में फीस, ड्रेस और स्टेशनरी को लेकर नियम निर्धारित नहीं हो सके हैं। अभिभावकों का कहना है कि फीस कमेटी बने तीन साल हो चुके हैं, लेकिन प्राइवेट स्कूलों की लाबी के पीछे बड़े और प्रभावशाली लोगों का हाथ होने के कारण आज तक इसे लागू नहीं किया गया है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब महत्वपूर्ण निर्देशों की फाइल एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर की 40 सीढ़ियां चढ़ने में 16 दिन ले तो आदेशों को अमलीजामा पहनाने में कितना समय लगेगा। यह तो भगवान ही जाने।
सुस्त कार्रवाई से अभिभावक खफा
28 मार्च को फीस कमेटी के सेकेंड फ्लोर पर स्थित एक दफ्तर से चौथे फ्लोर स्थित डीपीआई के दफ्तर तक पहुंचने में फाइल 16वें दिन यानि 12 अप्रैल को पहुंची थी। इसके अगले दिन से लगातार पांच सरकारी छुट्टियां थीं। प्राइवेट स्कूलों की एडवाइजरी को एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर और प्राइवेट स्कूलों को दिए जाने वाले दिशा-निर्देश कैसे लागू होंगे, ये सुस्त कार्रवाई का ही नतीजा है।
अभिभावकों का सवाल
अभिभावकों ने सवाल उठाया कि जब 15 अप्रैल से स्कूलों में सेशन शुरू हो चुका है और फीस, ड्रेस, किताबें खरीदी जा चुकी हैं। इसके बाद सरकारी पत्र व्यवहार से उन्हें क्या लाभ मिलेगा।