आगरा में एलआईसी कर्मचारियों के साथ की गई 25 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में तहरीर मिलने के चार दिन बाद भी हरीपर्वत थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है। इस बीच 65 और तहरीर आ चुकी हैं।
पीड़ित परेशान हैं, जबकि पुलिस आरोपियों को दूर भाग जाने का पूरा मौका दे रही है। बीमा संस्थान कर्मचारी वेतन भोगी सरकारी ऋण एवं साख समिति ने यह ठगी की है। समिति के पदाधिकारी 25 दिन से फरार हैं।
एलआईसी कर्मचारी थाना हरीपर्वत में तहरीर दे चुके, एसएसपी दफ्तर में शिकायत की, एलआईसी दफ्तर में प्रदर्शन किया, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। पीड़ित चाहते हैं कि आरोपी जल्द से जल्द गिरफ्तार किए जाएं।
पुलिस का कहना है कि यह मामला धोखाधड़ी का है, इसकी एफआईआर एसएसपी के निर्देश के बाद ही दर्ज होगी। पीड़ित कह रहे हैं कि जब वे सभी जगह शिकायत कर चुके, तो अब और कहां जाएं? यह कैसा नियम है, जो मुल्जिमों को फायदा पहुंचाता है।
यह रकम एफडीआर के रूप में जमा कराई गई थी। एफडीआर पर 11 फीसदी ब्याज देने की बात कही गई थी। मोटा पैसा जमा होते ही समिति के पदाधिकारी इसे लेकर भाग गए। एलआईसी कर्मचारियों, परिजनों और रिश्तेदारों के लिए यह समिति 2004 में बनी थी।
इसका काम कर्मचारियों को जरूरत पड़ने पर ऋण मुहैया कराना है। साथ ही जो पैसा जमा कराना चाहे, उसकी एफडीआर बनाकर ब्याज देना है। जिन लोगों ने एफडीआर में पैसा जमा कराया, उन्हें ही चोट लगी है।
इसका अध्यक्ष विष्णु अवतार वर्मा है और सचिव ब्रजपाल। विष्णु की पत्नी सविता और ब्रजपाल की पत्नी सविता भी पदाधिकारी हैं। केस दर्ज न किए जाने पर हरीपर्वत थाना के इंस्पेक्टर का कहना है कि जांच करके रिपोर्ट एसएसपी आफिस भेजी जा चुकी है। वहां से निर्देश मिलते ही केस दर्ज कर लिया जाएगा।
आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, औरैया, इटावा, कन्नौज के सैकड़ों कर्मचारियों और उनके रिश्तेदारों का पैसा लेकर आरोपी भागे हैं। बड़ी संख्या रिटायर्ड कर्मचारियों की है। 50 हजार से 50 लाख तक की एफडीआर हैं। अभी तक 66 तहरीर दी जा चुकी हैं। रोजाना 15-20 आ रही हैं।