पुलिस विभाग ने वित्त वर्ष 2012-13 में सरकारी खजाने से अपने कर्मचारियों की फेयरवेल पर 3.33 हजार से ज्यादा की राशि खर्च कर दी। ऑडिट विभाग ने आपत्ति जताते हुए विभाग से जवाब मांगा है। आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग द्वारा मांगी गई सूचना में इसका खुलासा हुआ है।
मालूम हो कि पिछले साल 15 नवंबर को पूर्व आईजी पीके श्रीवास्तव के शहर से रुखसत होने से पहले फेयरवेल पार्टी का आयोजन किया गया था। नियमों के अनुसार बिना पब्लिक इंटरेस्ट के सरकारी खर्चा नहीं किया जा सकता है।
इन पार्टियों में सिर्फ पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों ने भाग लिया था। इससे शहर को कोई फायदा नहीं मिला था।
कर्मचारी इकट्ठा करके करते हैं खर्चा
इटंक उपाध्यक्ष हरजिंद्र सिंह का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में किसी का तबादला या कोई रिटायर होता है तो उसे फेयरवेल पार्टी दी जाती है। इसका खर्च विभाग के कर्मचारी ही निजी तौर पर उठाते हैं। अगर कोई गिफ्ट भी दिया जाता है तो भी राशि सबसे इकट्ठा की जाती है।
इतना सम्मान तो बनता है...
पुलिस विभाग में जब कोई कर्मचारी रिटायर होता है तो उसे पुलिस लाइन में बुलाकर सम्मानित किया जाता है। इसमें पुलिस के आला अधिकारी भी मौजूद रहते है।
यहां रिटायर होने वाले कर्मचारी को उसका पीएफ और अन्य भत्तों का चेक देने के साथ साथ सम्मानित भी किया जाता है। रिटायर होने वाले कर्मचारी के परिजन भी समारोह में शामिल होते है।
पुलिस के अनुसार एक कर्मचारी 25 से 35 साल विभाग में सर्विस करता है। ऐसे में रिटायर होने वाले कर्मचारी का इतना सम्मान तो बनता है।
पहले घोड़ों की खरीद पर लगा था ऑब्जेक्शन
इससे पहले ऑडिट विभाग पुलिस विभाग द्वारा खरीदे गए घोड़ों पर ऑडिट ऑब्जेक्शन लगा चुका है। विभाग के अनुसार पुलिस चार साल से कम उम्र के घोड़ों को नहीं खरीद सकती। इसके बावजूद एक से डेढ़ साल की आयु के घोड़े खरीदे गए।
जिम्मेदार अधिकारी से हो रिकवरी: गर्ग
आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग का कहना है कि डायरेक्टर जनरल ऑफ अकाउंट विभाग ने ऑडिट ऑब्जेक्शन लगाया है। उनका कहना है कि जिस अधिकारी के आदेश पर यह खर्चा किया गया, उनसे खर्च की गई राशि की रिकवरी की जानी चाहिए।