आरक्षण का मुद्दा हमेशा से ही सरकारों के लिए राजनीतिक रोटियां सेंकने वाला होता है। ऐसा ही कुछ बीते कई वर्षों से राजस्थान में भी देखने को मिल रहा है। यहां का गुर्जर समाज बीते करीब आठ वर्षों से आरक्षण की मांग कर रहा है। अब राजस्थान सरकार गुर्जर सहित पांच अन्य जातियों को अलग से आरक्षण देने के लिए विधानसभ में नया बिल लेकर आयी है। बुधवार को पेश किए गए इस बिल पर चर्चा आज होगी। लेकिन नया बिल यदि लागू होता है तो राज्य में ओबीसी कोटा 21 फीसदी से बढ़कर 26 फीसदी हो जाएगा। सरकार की मंशा है वर्तमान ओबीसी कोटे को दो भागों में बांटकर पांच जातियों को आरक्षण दिया जाए। वहीं कुल आरक्षण 50 फीसदी से बढ़कर 54 फीसदी हो जाएगा।
कोर्ट में मिल सकती है चुनौती
किरोड़ी सिंह बैंसला
ऐसे में फिर से इस आरक्षण बिल को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है और चौथी बार यह बिल फंस सकता है। गौरतलब है कि बीते करीब नौ वर्षों से राजस्थान का गुर्जर समाज अलग से आरक्षण की मांग कर रहा है। लेकिन कई धरने प्रदर्शनों के बाद भी मामला अभी तक लटका हुआ है। वहीं अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव और कुछ दिनों में होने वाले तीन उपचुनाव पर गुर्जर वोट असर डाल सकता है। इसलिए सरकार जल्द से जल्द इस मुद्दे पर वाह वाही लूटने के प्रयास में है। विशेषकर अजमेर लोकसभा उपचुनाव के नतीजे गुर्जर वोट जरुर प्रभावित करेगा।