फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अतिक्रमण अभियान में खुद ढहाने लगे मस्जिद

Sat, 01 Sep 2018 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
enchrochment - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
अतिक्रमण अभियान में धार्मिक स्थल भी नहीं छूट रहे। पूर्व में हरिहरगंज में मंदिर गिराए जाने के बाद अब शुक्रवार को आबूनगर में मस्जिद का अतिक्रमण गिरना भी शुरू हो गया। हालांकि मस्जिद गिराने के लिए प्रशासन पहुंचा तो लोगों ने समय मांग लिया। इसके बाद सहूलियत के अनुसार मस्जिद गिराने में मजदूरों को लगा दिया गया। मजदूरों को लगाकर अतिक्रमण वाले हिस्से को गिराया जा रहा है। इधर, मस्जिद गिरना शुरू होने से आस पास जो लोग निशान लगने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटा रहे थे, उन्होंने भी अपनी इमारतें ढहानी शुरू कर दी।  
विज्ञापन

 शुक्रवार की शाम उप जिलाधिकारी प्रेम प्रकाश तिवारी और सीओ कपिल देव मिश्र के नेतृत्व में पूरी टीम ने जीटी रोड के आबूनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाया। निशान लगने के बाद भी जिन्होंने अपनी इमारतें गिराना शुरू नहीं किया था, वहां जेसीबी ने अतिक्रमण हटा दिया। इसी क्रम में दो दिन पूर्व पत्थरकटा से कोतवाली तक के रोड के तीनों मानकों के आधार पर नगर पालिका और राजस्व की टीमों ने निशान लगाया। पत्थरकटा से मुराइन टोला तक चौदह मीटर और मुराइन टोला पुलिस चौकी से चौके होते हुए कोतवाली तक बारह-बारह मीटर पर टीम ने लोगों के घरों और दुकानों में लाल निशान लगा दिए। निशानदेही और नाप करने पहुंची टीम के काम को देखने के लिए आसपास के लोग भीड़ लगाए रहे।  

 
जिस काम की मंशा से अतिक्रमण हटवाया जा रहा है, वह मंशा पूरी हो जाए तो अच्छा है। नवरात्रि आने वाली है और मलबे का ढेर खत्म नहीं हो रहा है। जो तेजी अभियान में दिख रही है, वही तेजी मलबा हटाने में भी दिखे तो ज्यादा अच्छा रहेगा। नवरात्रि के पहले गलियां और सड़कें सुव्यवस्थित होनी चाहिए।  - जितेंद्र कुमार तिवारी  
विज्ञापन

 
किराए का रिक्शा चलाते हैं। पाई-पाई जोड़ कर बड़ी मुश्किल से एक छत बनवाई थी। प्रशासन के अभियान में वो भी टूट गई। घर गिरी का अगर मुआवजा मिल जाता तो कहीं बस जाते। मगर अब चंद सिक्कों की आमदनी से घर कैसे बनवा पाएगा कुछ समझ नहीं आ रहा है।  - ओम प्रकाश साहू  

 
जिन रास्तों में प्रशासन अपने मानक से अतिक्रमण हटा चुका है, कम से कम वहां तो नया सृृृृृजन शुरु ही हो जाना चाहिए। ताकि कुछ तो नया बदलाव दिखाई पड़े। नवरात्रि आ रही है और शहर उजड़ा पड़ा है। शहर के ऐसे हालातों में पर्व कैसे शुुरू होगा, कुछ पता नहीं चल रहा है।  - पप्पू गुप्ता  

 
कैंसर से पीड़ित हूं जो जमा पूंजी थी वो इलाज में लग गई। अभी भी उपचार के लिए पैसों की बेहद जद्दोजहद है। ऐसी दशा में घर गिर जाना हमारे लिए किसी आपदा से कम नहीं है। लग रहा है समय हमारी परीक्षा ले रहा है। उपचार कराएं या घर बनवाएं विकल्प नहीं चुन पा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें