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मां को नहीं मिला आतंकी आबिद में अपना प्रवीण, डीएनए टेस्ट की मांग

Sun, 17 Jul 2016 09:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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आतंकी का अखबार में प्रकाशित फोटो व अन्य फोटो - फोटो : amar ujala
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जैश ए मोहम्मद के सजायाफ्ता पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद आबिद की शक्ल अपने लापता बेटे प्रवीण कुमार से मिलने की बात कह रही मेरठ की महिला महेशदेवी ने रविवार को लखनऊ जिला कारागार में आबिद से मुलाकात की।
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इस मुलाकात के बाद उसका कहना है कि आबिद में उसे वे शारीरिक चिह्न नहीं मिले जो प्रवीण में थे। इनमें हाथ पर कलाई के हिस्से में गोदा गया प्रवीण का नाम आबिद के हाथ पर नहीं था, माथे व पैरों पर चोट के निशान भी मेल नहीं खा रहे थे, चेहरे पर तिल के निशान आबिद की दाढ़ी में छिपे गए थे।

ऐसे में उन्हें नहीं लगता कि आबिद ही प्रवीण है, हालांकि वे पूरी संतुष्टि के लिए डीएनए की मांग मुख्यमंत्री से कर रही हैं।

दूसरी ओर मेरठ के इस परिवार ने आबिद के डीएन से परिवार के डीएनए का मिलान कराने की मांग की है, ताकि किसी भी तरह संशय अगर बचा है तो वह दूर हो जाए और उन्हें मानसिक रूप से मान लेने में मदद मिले कि उनका परिजन जेल में कैद नहीं है।
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आबिद बोला, वह भारतीय नहीं पाकिस्तानी है

प्रवीण का फोटो व उसकी मां महेश देवी - फोटो : amar ujala
करीब 30 मिनट चली इस मुलाकात के दौरान आबिद, प्रवीण की मां महेशदेवी, उसका छोटा भाई पवन, रिहाई मंच के अध्यक्ष व एडवोकेट मोहम्मद शुएब सहित जेल के अधिकारी, एसटीएफ, एटीएफ और कई पुलिस अधिकारी मौजूद थे।

मुलाकात के बाद महेशदेवी और पवन ने बताया कि आबिद बेहद सरल ढंग से बात कर रहा था। आबिद ने उन्हें पहचानने से इनकार करते हुए कहा कि वे उसके परिजन नहीं है, उसका परिवार पाकिस्तान में है। वह भारतीय नहीं पाकिस्तानी है।

कुछ देर बातचीत और चिह्न देखने के बाद वे बाहर आ गए। बाहर आकर महेशदेवी काफी देर रोईं और उन्होंने बताया कि आबिद के शरीर पर उन्हें वे चिह्न नहीं मिले जो प्रवीण के शरीर पर थे। उन्हें नहीं लगता कि आबिद उनका प्रवीण हो सकता है।

पहचान लेता, तब भी डीएनए टेस्ट की मांग करते
प्रवीण के भाई पवन ने कहा कि वे जानते हैं आबिद देश में आतंकी फैलाने और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के मामले में उम्र कैद काट रहा है। अगर उसने खुद को प्रवीण बताया होता तब भी वे डीएनए टेस्ट की मांग जरूर करवाते। वे नहीं चाहते कि कोई शक बाकी रहे, इसलिए डीएनए टेस्ट चाह रहे हैं। वे इसके लिए हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र देंगे।
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नहीं पहचाना, फिर अब क्यों बचा है शक?

- फोटो : amar ujala
1. बातचीत का लहजा : पवन ने दावा किया कि आबिद की बातचीत का लहजा पश्चिमी यूपी के किसी व्यक्ति की बोलचाल जैसा था।

2. गोदना हटाया जा सकता है : मोहम्मद शुएब का कहना है कि हाथ पर गोदा हुआ नाम साफ करना मेडिकल साइंस में मुश्किल नहीं है।

जेल में क्या बात हुई
पवन ने बताया कि उन्होंने आबिद से कहा कि ‘तू मेरा भाई है, मुझे पहचान क्यूं नहीं रहा है?’ आबिद ने मुस्कुराकर कहा, ‘नहीं भाई मैं तेरा भाई नहीं हूं, तुझे गलतफहमी हुई है।’ पवन ने उसे प्रवीण की पुरानी फोटो निकालकर दिखाई, इसे देखकर आबिद ने कहा, ‘मेरी भी फोटो पहले (जब दाढ़ी नहीं थी) ऐसी ही आती थी, लेकिन ये मैं नहीं हूं।’

महेशदेवी ने उसके माथे पर चोट का निशान देखा, उसे कलाई पर गोदा नाम दिखाने को कहा, तो आबिद ने वैसा ही किया। कलाई पर कुछ नहीं लिखा था, महेशदेवी के आंसू आ गए, उसने मान लिया कि वह प्रवीण नहीं है।

पवन कुमार ने दूसरी चोटों के निशान देखे, माथे पर चोट का निशान था, लेकिन छोटा। पैरों में भी निशान मिले। लेकिन आबिद ने साफ मना कर दिया कि वह प्रवीण है, ऐसे में वे लोग लौट आए।
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