27jjrp01- राजकीय नेहरू कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देते विद्यार्थी। स्रोत : कॉलेज
झज्जर। राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय में मंगलवार को हरियाणा साहित्य उत्सव के तहत ‘हरियाणा विरासत, वर्तमान और विमर्श’ कार्यक्रम का आगाज हुआ। इसमें हरियाणवी पहचान, लोक परंपराओं और महिलाओं की बदलती सामाजिक भूमिका पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में कॉलेज के पूर्व विद्यार्थी और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक डॉ. कश्मीरी लाल मित्तल मुख्य अतिथि रहे। प्राचार्य प्रो. दलबीर सिंह ने उनका परिचय दिया। डॉ. मित्तल ने अमेरिका प्रवास के संस्मरण साझा किए और विद्यार्थियों को लक्ष्य के प्रति सजग रहने व अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
पहले सत्र में डॉ. अनूप लाठर ने ‘हरियाणवी होने के मायने’ विषय पर विचार रखे। रिटायर्ड कर्नल योगेंद्र सिंह ने उनसे संवाद किया। डॉ. लाठर ने कहा कि हरियाणवी पहचान केवल धरती से नहीं, बल्कि सोच और जीवनशैली से भी जुड़ी है। हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत शिवालिक से अरावली तक फैली है।
दूसरे सत्र में अवंती कुंडू ने इतिहास प्राध्यापक अमनदीप से ‘पवित्र हरियाणा देवी-देवताओं की परंपरा और पुनर्व्याख्या’ विषय पर चर्चा की। अमनदीप ने कहा कि औपनिवेशिक नीतियों के तहत धर्म, जाति और समुदाय के आधार पर वर्गीकरण को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के प्रभाव से सांझी संस्कृति, प्रकृति पूजा और पुरखों की पूजा जैसी परंपराएं ओझल हो रही हैं। अपनी जड़ों और साहित्य से जुड़े रहना जरूरी है।
तीसरे सत्र में सर्वप्रिया सांगवान और अभिनेत्री सुमित्रा हुड्डा ने ‘हरियाणवी महिला रूढ़िवादिता से परे’ विषय पर चर्चा की। सुमित्रा ने नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में डॉ. मित्तल ने महाविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली निशा, सुनिप कुमारी और तानिया को 15-15 हजार रुपये देकर सम्मानित किया। विद्यार्थियों ने लोक नृत्य और हरियाणवी गीत-संगीत की प्रस्तुतियां दीं।
27jjrp01- राजकीय नेहरू कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देते विद्यार्थी। स्रोत : कॉलेज