बहुचर्चित जम्मू सेक्स स्कैंडल मामले में सोमवार को दोनों पक्षों की ओर से अंतिम बहस की गई। सजा का ऐलान 6 जून को किया जाएगा। बहस के दौरान बीएसएफ के पूर्व डीआईजी केसी पाड़ी ने अदालत से अपील की कि उन्होंने देश की सुरक्षा करते हुए 40 के करीब उग्रवादी मारे हैं। उनका नाम प्रेसिडेंट मेडल के लिए भी भेजा गया था। ऐसे में उनकी देश के प्रति की गई सेवा और उम्र को ध्यान में रखते हुए उनके प्रति नरमी बरती जाए और उन्हें कम से कम सजा दी जाए।
पूर्व डीआईजी के अलावा पूर्व डीएसपी समेत अन्य आरोपियों ने भी अदालत से उनके प्रति नरमी बरतने की अपील करते हुए उन्हें कम से कम सजा देने की अपील की। बचाव पक्ष की दलीलों के बाद सीबीआई की ओर से पेश हुए सरकारी वकील केपी सिंह ने दलील दी कि दोषी ने जो कृत्य किया वह एक 13 वर्षीय नाबालिग के साथ किया है। उस पर देश और लोगों की सुरक्षा का जिम्मा था लेकिन उल्टा उसने बीएसएफ कैंप में ही नाबालिग से दुराचार किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसले के लिए अब 6 जून की की तारीख तय की है।
सोमवार को सीबीआई कोर्ट द्वारा बहुचर्चित जम्मू सेक्स स्कैंडल मामले में अंतिम फैसला सुनाया जाना था। इससे पहले बचाव पक्ष की ओर से दोषियों को कम से कम सजा देने की अपील की गई। बीएसएफ के पूर्व डीआईजी की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट विपिन घई ने कई फैसलों को आधार बनाकर पाड़ी को कम से कम सजा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि, शुरुआत में सीबीआई ने केस में 56 आरोपी बनाए थे, लेकिन चार्जशीट केवल 9 के खिलाफ दायर की। इनमें से भी दो की मौत हो चुकी है। बाकियों में से पांच को अदालत दोषी करार दे चुकी है और दो को बरी कर चुकी है।
उन्होंने दलील दी कि डीआईजी ने कई साल तक देश की सेवा की है। अब उनकी उम्र 67 साल हो चुकी है। उनकी पत्नी की केस के ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। अब उनके परिवार में केवल दो बेटियां हैं, जिनकी पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर है इसलिए उनके प्रति नरमी बरती जाए। इस पर सरकारी वकील केपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को आधार बनाते हुए दलील दी कि, रेप जैसे संगीन मामलों में दोषी की उम्र को कम सजा देने के लिए आधार नहीं बनाया जा सकता है। इस मामले में तो दोषी डीआईजी था, उस पर देश के साथ ही स्थानीय लोगों की सुरक्षा का जिम्मा था। ऐसे में नाबालिग के साथ दुराचार करने वाला अधिक से अधिक सजा का हकदार है।
वहीं जम्मू पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर ने भी अदालत में दो बच्चों और उसकी उम्र को सजा में नरमी का आधार बनाया। साथ ही उसे स्पाइनल कॉड की बीमारी होने की दलील दी। इसके लिए उसने इसका एक्सरे भी पेश किया। वहीं सरकारी वकील सिंह ने दलील दी कि दोषी एक पुलिस अधिकारी था और वह जानता था कि वह नाबालिग के साथ जो कर रहा है वह गलत है। इसके बावजूद उसने उसके साथ गलत किया, जबकि उसे उस माहौल से बाहर निकालना चाहिए था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। ऐसे में वह कम नहीं अधिक से अधिक सजा का हकदार है। वहीं अन्य तीनों दोषियों शब्बीर अहमद लवे, मसूद अहमद उर्फ मकसूद और शब्बीर अहमद लान्गू ने भी उनके छोटे-छोटे बच्चे होने और परिवार में अकेला कमाने वाला सदस्य होने को आधार बनाते हुए अदालत से उनके खिलाफ नरमी बरतते हुए उन्हें कम से कम सजा देने की अपील की। वहीं सरकारी वकील ने सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की अपील की।
परिवार के सदस्य भी रहे मौजूद
अदालत से दोषी करार दिए जा चुके पूर्व डीआईजी केसी पाड़ी, पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर, शब्बीर अहमद लवे, मसूद अहमद उर्फ मकसूद और शब्बीर अहमद लान्गू के परिजन भी अदालत में मौजूद रहे। पूर्व डीआईजी की बेटी भी उनसे मिलने पहुंची। वहीं पूर्व डीएसपी के दोनों बेटे भी इस दौरान मौजूद रहे। इसके अलावा अन्य तीनों दोषियों के परिवार भी अदालत में मौजूद रहे।