पंजाब के निजी स्कूलों को अब हर हाल में दसवीं कक्षा तक पंजाबी पढ़ानी होगी। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग ने हाल ही में इस संबंध में आदेश जारी किया है। सरकारी स्कूलों में पहले से ही यह आदेश लागू है।
सरकार ने 2008 में पंजाबी एंड लर्निंग ऑफ अदर लैंग्वेज एक्ट लागू किया था। इसके तहत पंजाबी की पढ़ाई यकीनी बनाई गई थी। सरकारी स्कूलों में तो पंजाबी यकीनी हो गई थी। पर, निजी स्कूलों ने इसे दरकिनार कर दिया। तमाम पंजाबी संगठन और बुद्धिजीवी लगातार इस मामले को उठा रहे थे कि निजी स्कूलों में मां-बोली पंजाबी की पढ़ाई को तरजीह नहीं दी जा रही।
संगठनों ने यह भी फीडबैक दिया था कि निजी स्कूलों में पंजाबी में बात करने पर बच्चों को सजा दी जाती है, उनसे फाइन वसूला जाता है। सीएम प्रकाश सिंह बादल को भी इस संबंध में शिकायत दी गई थी। 21 फरवरी-14 को पूरे पंजाब में मां-बोली दिवस मनाया जाता है।
इससे पहले सरकार ने निजी स्कूलों के लिए भी पंजाबी अनिवार्य कर दी है। शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव अंजलि भांवरा ने हाल ही में इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि आदेश का पालन यकीनी बनाया जाए।