बिलखती हुई तीन साल की मासूम, शरीर पर चिमटे से जलाने के निशान, सिर में कीड़े लगे गहरे जख्म...। ये पढ़कर आप यही सोचेंगे कि किसी गैर ने बच्ची को ये दर्द दिया होगा। लेकिन नहीं, उसकी ये हालत करने वाला कोई और नहीं, उसकी मां ही थी।
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मासूम मरजीना का कुसूर सिर्फ इतना था कि उसने मां से बिना पूछे ही फातिहा का हलवा खा लिया था। यातनाएं देने के बाद मां ने मासूम को घर से निकाल दिया। ये वाक्या तीन साल पहले का है।
लावारिस बच्ची को चाइल्ड लाइन ने अपने संरक्षण में लेकर इलाज कराया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और गोंडा के शिशु गृह में पल रही है।
छह साल की मरजीना को गोंडा, बहराइच ही नहीं, पूरे भारत में कोई भी गोद लेने आगे नहीं आया। लेकिन, सात समंदर पार एक निसंतान दंपती ने इस बच्ची को अपनाने का फैसला किया है। माह भर बाद मरजीना कनाडा चली जाएगी।
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शरीर पर थे बेहद गहरे जख्म
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- फोटो : Amar Ujala
चाइल्ड लाइन निदेशक डॉ. जीतेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि वर्ष 2013 के जून में जरवलरोड बाजार में एक तीन वर्षीय बालिका अर्द्धबेहोशी की हालत में चाइल्ड लाइन को मिली थी। उसके शरीर पर गहरे जख्म थे। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
होश में आने पर मासूम तोतली बोली में सिर्फ इतना बता पा रही थी कि घर में फातिहा का हलवा खाने पर मां ने चिमटे से दागा, मारा और घर से भगा दिया। उसने अपना नाम मरजीना बताया था।
चाइल्ड लाइन की काफी कोशिश के बाद भी मां-पिता का पता नहीं चल सका तो चाइल्ड लाइन ने बाल न्यायालय के माध्यम से बालिका को गोंडा के शिशु गृह के सुपुर्द कर दिया।
टीवी, रेडियो व न्यूज पेपर में दिए विज्ञापन पर कोई नहीं आया
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- फोटो : amar ujala
शिशु गृह के अधीक्षक उपेंद्र कुमार ने बताया कि बालिका जब उनके संरक्षण में आई थी तो काफी बीमार थी। तीन माह केजीएमयू और सिविल हास्पिटल लखनऊ में इलाज चला। स्वस्थ होने पर उसके परिवार की खोज के लिए दूरदर्शन, रेडियो और न्यूज पेपरों के माध्यम से विज्ञापन दिए गए लेकिन परिवार का पता नहीं लग सका।
इस पर अन्य लावारिस बच्चों की तरह मरजीना का नाम भी केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत दत्तक ग्रहण सूची में ऑनलाइन कर दिया गया। उपेंद्र ने बताया कि बच्चे का नाम ऑनलाइन होने के 60 दिन के अंदर भारतीय दंपती द्वारा गोद लेने का इंतजार किया जाता है।
इस अवधि में बाराबंकी, दिल्ली और राजस्थान से तीन दंपती सामने आए तो जरूर लेकिन मरजीना के सिर में हुए जख्म देखकर वे पीछे हट गए। 60 दिन पूरे होने के बाद प्रक्रिया के तहत मरजीना का नाम विदेशों में वेबसाइट पर ऑनलाइन किया गया। इस पर सप्ताह भर बाद ही कनाडा के चिकित्सक दंपती ने मरजीना को गोद लेने के लिए आवेदन किया।
मरजीना के दत्तक ग्रहण प्रक्रिया की फाइल विदेश मंत्रालय के माध्यम से महिला बाल विकास मंत्रालय को भेजी गई है। माह भर के अंदर कागजी कार्रवाई पूरी होगी। तब कनाडा के दंपती को गोंडा आकर मरजीना को लेना होगा।
गोंडा से ही बनेगा वीजा और पासपोर्ट
मरजीना
- फोटो : amar ujala
शिशु गृह गोंडा के अधीक्षक उपेंद्र ने बताया कि महिला बाल विकास मंत्रालय का पत्र अभी नहीं मिला है। पत्र मिलने के बाद मरजीना के गोद लेने के मामले में नगर पालिका गोंडा को अवगत कराया जाएगा। वहां से जन्मतिथि प्रमाण पत्र बनेगा। इसके बाद वीजा और पासपोर्ट बनवाकर उसे कनाडा भेजा जाएगा।
उन्होंने बताया कि अगर भारतीय दंपती द्वारा गोद लेने की पहल की जाती है तो प्रक्रिया पूरे होने के लिए 15 दिन का समय निर्धारित है। जबकि, विदेशी दंपती के आवेदन करने पर 90 दिन के अंदर प्रक्रिया पूरी की जाती है।
मरजीना का नया नाम खुशबू, कक्षा एक की है छात्रा
उपेंद्र ने बताया कि मरजीना स्वस्थ होने पर वह काफी चंचल हो गई। हर गतिविधि में सक्रिय रहती थी। जिसके चलते मरजीना के साथ ही उसका नाम खुशबू भी रख दिया गया। अभिलेखों में भी मरजीना के साथ उर्फ में खुशबू नाम दर्ज है।
उपेंद्र ने बताया कि इलाज के बाद स्वस्थ होने पर बाल शिशु गृह में ही मरजीना के पढ़ाई की व्यवस्था की गई। अधीक्षक उपेंद्र ने बताया कि वह इस समय कक्षा एक में पढ़ रही है। पढ़ने में खूब मन लगाती ही है। सवाल-जवाब में भी काफी तेज है।
मरजीना को गोद लेने के लिए जिस कनाडा के दंपती ने पहल की है, वह कनाडा के नार्थ वेस्ट में एलब्रेटा एडमानटोन शहर में रहते हैं। मरजीना को जो पिता मिलेंगे, उनका नाम ओमार शरीफ रहमान है जबकि मां का नाम महुवा घोस है।
पिता मूलरूप से कनाडा के हैं, जबकि मां भारत के पश्चिम बंगाल की हैं। दंपती एमडी मेडिसिन पीएचडी की योग्यता रखते हैं।
ओमार शरीफ की वार्षिक आय दो लाख रुपये और महुवा की वार्षिक आय एक लाख 46 हजार रुपये है। शिशु गृह गोंडा के अधीक्षक उपेंद्र ने बताया कि दंपती ने जो प्रपत्र विदेश मंत्रालय को उपलब्ध कराए हैं, उसके तहत तीन दिसंबर 2004 को उनकी शादी हुई थी। लेकिन, अब तक उन्हें संतान नहीं हुए। इसी कारण वे मरजीना को गोद लेना चाहते हैं।
विदेश मंत्रालय को जो डाटा भेजा गया है, उसके तहत दंपती ने कनाडा की एडॉप्सन सर्विसेस एल्ब्रेटा चिल्डे्रन्स सर्विसेज के माध्यम से मरजीना को चयनित किया है।