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विकलांग महिलाओं के लिए यौन हिंसा क़ानून संबंधी बाधाओं में सुधार

Fri, 06 Apr 2018 10:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी एक नई रिपोर्ट में यह कहा कि भारत में यौन हिंसा उत्तरजीवी विकलांग महिलाओं और लड़कियों को न्याय व्यवस्था तक पहुंचने में बड़ी-बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने द हंस फाउंडेशन की मदद से इस रिपोर्ट को लोगों तक पहुंचाया। पांच साल पहले सरकार ने यौन हिंसा मामलों के लिए महत्वपूर्ण सुधार किए थे, लेकिन इसके कार्यान्वयन में गंभीर कमियां मौजूद हैं।
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विकलांगता अधिकार कार्यकर्ता और रिपोर्ट की सह-लेखिका निधि गोयल ने कहा, "साल 2013 के बाद से भारत ने यौन हिंसा पर महत्वपूर्ण कानूनी सुधार किए हैं, लेकिन विकलांग महिलाओं और लड़कियों की अभी भी न्याय तक समान पहुंच नहीं बन पाई है। विकलांग भारतीय महिलाओं और लड़कियों को अब यौन हिंसा का अदृश्य शिकार बने नहीं रहना चाहिए"
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द हंस फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती श्वेता रावत ने इस मौके पर बताया की द हंस फाउंडेशन ने शुरू से ही सामाजिक सुरक्षा और विकलांगता संबंधी अधिकारों पर काम किया है। द हंस फाउंडेशन ने हमेशा माना है की स्वास्थ्य सुरक्षा, शिक्षा और रोज़गार के अवसर सबको बराबर रूप से मिलने चाहियें। ह्यूमन राइट्स वॉच की यह रिपोर्ट एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल उठाती है की कैसे भारत में यौन हिंसा से विकलांग महिलाओं और बच्चों को न्याय व्यवस्था तक पहुंचने में बड़ी-बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

61 पन्नों की रिपोर्ट, "यौन हिंसा के अदृश्य शिकार: भारत में विकलांग महिलाओं और लड़कियों की न्याय तक पहुँच" विस्तार से उन चुनौतियों के बारे में बताती है जिनका बहुत सी विकलांग महिलाएं और लड़कियां न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सामना कर रही हैं। इनमें पुलिस को दुर्व्यवहार की रिपोर्टिंग, उचित चिकित्सा देखभाल प्राप्त करने, शिकायतों की जांच करवाने, अदालती प्रक्रिया से गुजरने और पर्याप्त क्षतिपूर्ति प्राप्त करने संबंधी चुनौतियां शामिल हैं।

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