द हंस फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती श्वेता रावत ने इस मौके पर बताया की द हंस फाउंडेशन ने शुरू से ही सामाजिक सुरक्षा और विकलांगता संबंधी अधिकारों पर काम किया है। द हंस फाउंडेशन ने हमेशा माना है की स्वास्थ्य सुरक्षा, शिक्षा और रोज़गार के अवसर सबको बराबर रूप से मिलने चाहियें। ह्यूमन राइट्स वॉच की यह रिपोर्ट एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल उठाती है की कैसे भारत में यौन हिंसा से विकलांग महिलाओं और बच्चों को न्याय व्यवस्था तक पहुंचने में बड़ी-बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
61 पन्नों की रिपोर्ट, "यौन हिंसा के अदृश्य शिकार: भारत में विकलांग महिलाओं और लड़कियों की न्याय तक पहुँच" विस्तार से उन चुनौतियों के बारे में बताती है जिनका बहुत सी विकलांग महिलाएं और लड़कियां न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सामना कर रही हैं। इनमें पुलिस को दुर्व्यवहार की रिपोर्टिंग, उचित चिकित्सा देखभाल प्राप्त करने, शिकायतों की जांच करवाने, अदालती प्रक्रिया से गुजरने और पर्याप्त क्षतिपूर्ति प्राप्त करने संबंधी चुनौतियां शामिल हैं।