महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम पर भी बजट का साया मड़रा रहा है। यही वजह है कि जाब कार्ड धारकों ने योजना के तहत काम किया लेकिन जब भुगतान की बारी आई तो बजट की कमी आड़े आ गई। अधिकारियों के चक्कर भी लगाए जा रहे है लेकिन कोई फायदा नहीं। हर बार यही जवाब मिलता कि बजट आते ही भुगतान किया जाएगा।
मजदूरी अटक जाने की वजह से आगे काम करने के लिए मजदूर तैयार नहीं हो रहे है। मौजूदा समय में तकरीवन 10 हजार जॉब कार्ड धारक है जो दो करोड़ 69 लाख 81 हजार रुपये की मजदूरी कर चुके है लेकिन अभी तक खाते में फूटी कौड़ी नहीं आई है। गांव से मजदूरों का पलायन रोकने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम लागू किया गया।