गोरखपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन की लापरवाही से बीए के करीब 40 नव प्रवेशी विद्यार्थियों के लिए परेशानी का सबब बन गई। काउंसिलिंग के बाद यूनिवर्सिटी की ओर से बैंक को चालान की कापी आधी-अधूरी भेजे जाने के चलते अभ्यर्थी फीस जमा करने के लिए चार दिनों से भटकते रहे। अभ्यर्थियों की काफी मशक्कत के बाद बुधवार की दोपहर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया और चालान की छूटी जानकारी बैंक को भेजी।
25 जून की काउंसिलिंग के बाद यूनिवर्सिटी की बीए प्रवेश समिति ने चालान की एक प्रति नव प्रवेशी अभ्यर्थियों को दी लेकिन उसकी दूसरी प्रति जो इलाहाबाद बैंक में भेजी, उसमें एक पेज गायब था। नतीजा उस पेज पर दर्ज अभ्यर्थियों के चालान की स्थिति बैंक तक नहीं पहुंची। अभ्यर्थी जब फीस जमा करने पहुंचे तो बैंक के कर्मचारियों ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि उनका कोई रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से नहीं आया है। यह सुनकर अभ्यर्थी परेशान हो गए। उन्होंने प्रवेश स्थल दीक्षा भवन और प्रशासनिक भवन की दौड़ लगानी शुरू कर दी।
पहले तो यूनिवर्सिटी के जिम्मेदारों ने इसे अभ्यर्थियों की लापरवाही समझ कर रुचि नहीं ली लेकिन जब दस्तक देने वाले अभ्यर्थियों की तादाद बढ़ने लगी तो चार दिन बाद उन्होंने मामले की सुध ली। छानबीन में पता चला कि चालान की बैंक को भेजी गई प्रति में एक पेज छूट गया है। स्थिति साफ होते ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तत्काल छूटे पेज को बैंक तक पहुंचवाया लेकिन जानकारी न हो पाने की वजह से अभ्यर्थी बुधवार को भी दिनभर भटकते रहे और यूनिवर्सिटी प्रशासन को कोसते हुए घर लौट गए। अभ्यर्थी बबिता, आकांक्षा, सविता और विजयानंद का कहना था कि चार दिन से भटक रहे हैं लेकिन साफ तौर पर कोई बता भी नहीं रहा कि हमें करना क्या है।
चालान की कॉपी भेजने में ही गलती हो गई। उसमें एक पेज छूट गया, जिसमें 40 अभ्यर्थियों के नाम है। जानकारी होते ही बैंक को वह पेज उपलब्ध करा दिया गया है। बृहस्पतिवार को अभ्यर्थी फीस जमा कर सकते हैं।
- प्रो. अजेय कुमार गुप्ता, प्रवेश समन्वयक