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पशु चारे की बढ़ती कीमतों पर किसानों का विरोध, दूध-घी के दाम बढ़ाने का फैसला

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साल्हावास। क्षेत्र के गांव बिरोहड़ और डावला के किसानों ने पशु चारे की लगातार बढ़ती कीमतों पर विरोध जताया है। उन्होंने एकजुट होकर दूध और घी के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया है। किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण पशुपालन व्यवसाय घाटे का सौदा बन गया है। इस कदम से व्यवसाय को डूबने से बचाने में मदद मिलेगी।
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बिरोहड़ गांव में किसानों ने भैंस के दूध का दाम 90 रुपये प्रति लीटर तय किया है। गाय का दूध 70 रुपये प्रति लीटर और घी 1500 रुपये प्रति किलोग्राम बेचने का फैसला लिया गया है। वहीं, डावला गांव में पशुपालकों ने भैंस का दूध 100 रुपये प्रति लीटर बेचने का निर्णय लिया है। डावला में गाय का दूध 80 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। किसान मंजीत, सुंदर, लीलाराम, राकेश, संजू और बलवान ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पशु चारे, खल, बिनौले और स्वास्थ्य सेवाओं के दाम कई गुना बढ़े हैं। लागत बढ़ने और बिक्री मूल्य स्थिर रहने से पशु व्यवसाय लगातार नुकसान में है। बचत न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में लोग तेजी से पशुपालन छोड़ रहे हैं।
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किसानों की शुद्धता की गारंटी
पशुपालकों ने ग्राहकों को शुद्ध और बिना मिलावट वाला दूध देने का वादा किया है। उन्होंने कहा कि ग्राहक अपने सामने बैठकर पशुपालकों से दूध निकलवाकर ले जा सकते हैं। दूध में किसी भी तरह की पानी की मिलावट नहीं की जाएगी। पशुपालकों का मानना है कि 90 रुपये प्रति लीटर की दर से भी उन्हें बड़ा मुनाफा नहीं होगा। यह दर केवल व्यवसाय को पूरी तरह डूबने से बचाने में सहायक होगी।
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दरों में लचीलापन और सरकारी मांग
पशुपालकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि दूध और घी की नई दरें उनकी मर्जी पर आधारित हैं। यदि कोई पशुपालक इससे कम दर पर दूध या घी बेचना चाहे तो उन्हें कोई एतराज नहीं होगा। कम दर पर बेचने वालों पर किसी भी तरह का कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। इसके साथ ही पशुपालकों और किसानों ने सरकार से मांग की है। उन्होंने पशु फीड की लगातार बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने की अपील की है।
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बड़े पशुपालकों से एकजुटता की अपील
पशुपालक रमेश, लक्ष्मण, अनिल और राजेश का कहना है कि यह संघर्ष केवल छोटे पशुपालकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। देश के बड़े पशुपालकों और डेयरी संगठनों को भी एक मंच पर आना चाहिए। उन्हें दूध का एक न्यायसंगत और उचित मानक मूल्य तय करना होगा। मनमाने दरों से लोगों में विरोधाभास की स्थिति पैदा होती है। दूध और घी के दाम बढ़ने से मिठाइयों के दाम भी बढ़ना तय है। इससे आम आदमी की जेब पर आर्थिक बोझ बढ़ना निश्चित है।
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