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प्रतिवर्ष इलेक्ट्रानिक वाहन में दोगुना बढ़ोतरी

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प्रतिवर्ष इलेक्ट्रानिक वाहन में दोगुना बढ़ोतरी
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खुर्जा। जिले में हर साल इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की संख्या दो से तीन गुना बढ़ रही है। वहीं पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की संख्या कम होती जा रही है। इसके अलावा सीएनजी से चलने वाले वाहनों की संख्या भी चार फीसदी बढ़ गई है। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के चलते लोगों की पसंद बदल रही है। इससे जहां लोगों की पॉकेट पर बोझ कम होगा, वहीं वायु प्रदूषण में भी कमी आएगी।
पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों से लोगों की जेब पर असर पड़ रहा है। ऐसे में लोगों ने वाहनों को लेकर भी अपना रुख मोड़ लिया है। 31 दिसंबर 2019 को पेट्रोल के दाम 75.14 रुपये और डीजल 67.96 रुपये प्रति लीटर था। वहीं वर्तमान में पेट्रोल 105.90 और डीजल 96.70 रुपये प्रति लीटर है। पिछले तीन साल में पेट्रोल और डीजल 30 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। ऐसे में डीजल व पेट्रोल वाहनों के प्रति लोगों का रुझान कम हुआ है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुुसार सीएनजी और इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की मांग अधिक बढ़ गई है। इलेक्ट्रॉनिक स्कूटर की कीमत पेट्रोल की बाइक से अधिक है और इंजन की क्षमता भी कम है फिर भी रोजाना के ईंधन के खर्चे से बचने के लिए लोग इलेक्ट्रॉनिक वाहनों में रुचि अधिक दिखा रहे हैं। निजी के साथ-साथ व्यवसायिक स्तर पर भी लोग पेट्रोल के खर्चे से बच रहे हैं। साल 2022 में अप्रैल माह तक कुल 585 इलेक्ट्रॉनिक वाहन खरीदे गए हैं, जिसमें 350 ई-रिक्शा हैं।
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साल - कुल वाहन - सीएनजी - पेट्रोल - इलेक्ट्रॉनिक वाहन
2020 - 43,930 - 1,064 (2.4%) - 39,308(89.4%) - 349 (0.7%)
2021 - 38,617 - 1,705 (4.4%) - 33,123(85.7%) - 734 (1.9%)
2022 - 16,155 - 1,129 (6.9%) - 13,074(80.9%) - 585 (3.6%)
(15 मई तक का आंकड़ा)
सीएनजी गाड़ियों ने तोड़ा रिकॉर्ड
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कोरोना के बाद सीएनजी गाड़ियों की मांग भी अधिक बढ़ गई थी। निर्माता कंपनी की ओर से अधिकांश गाड़ियों में सीएनजी की सुविधा दी जा रही है, जो लोगों को अधिक पसंद आ रही है। अभी तक साल 2018 में सबसे ज्यादा सीएनजी वाहन 2,402 (4.6%) की खरीदारी हुई थी, लेकिन साल 2022 में ये रिकॉर्ड टूट कर 6.9 प्रतिशत पहुंच गया है।
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सीएनजी और इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की खरीदारी अधिक हो रही है। पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम के कारण लोग इलेक्ट्रॉनिक स्कूटर अधिक पसंद कर रहे हैं। वहीं मजदूर वर्ग भी ई-रिक्शा चला रहा है। इससे वायु प्रदूषण भी कम होगा।
- मोहम्मद कय्यूम, एआरटीओ प्रशासन
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