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झज्जर सहित अन्य क्षेत्रों को रोशन करेंगे झज्जर में बने मिट्टी के दीये

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झज्जर। जिले के शिल्पकारों की तरफ से तैयार किए गए मिट्टी के दीये अलग-अलग क्षेत्रों को दिवाली के त्योहार पर रोशन करेंगे। शिल्पकारों ने दूर-दराज के क्षेत्रों में मिट्टी के बने दीयों को भेजने का काम पूरा कर लिया है। इसके अलावा फिलहाल आसपास के लोगों को दिवाली के लिए मिट्टी के दीये वितरित किए जा रहे हैं।
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दिवाली के त्योहार पर इस वर्ष जिले में लाखों रुपये का कारोबार है। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कारोबार में कमी आई है। इसके बाद भी लोगों ने मुंबई, गुजरात, उत्तर प्रदेश व दिल्ली में दीयों को तैयार करके भेजा है। इसके अलावा हरियाणा के भी अलग-अलग क्षेत्रों रेवाड़ी, रोहतक, सोनीपत, भिवानी, महेंद्रगढ़ व करनाल सहित अन्य क्षेत्रों में दीयों को मांग अनुसार भेजा जा रहा है।
झज्जर व आसपास के लोग भी शिल्पकारों के पास पहुंचकर दिवाली के त्योहार के लिए मिट्टी के दीये खरीद रहे हैं। अलग-अलग शिल्पकारों की तरफ से अलग-अलग मात्रा में दीये तैयार कर मांग अनुसार भेजा गया है। इसके अलावा शिल्पकारों ने डिजाइन वाले दीये गुजरात से मंगवाए हैं, जिनको मांग अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा रहा है। डिजाइन वाले दीयों पर रंग-रोगन लगाने का काम झज्जर में ही किया जा रहा है। आगामी दिवाली के त्योहार तक शिल्पकारों की तरफ से मिट्टी के दीये तैयार कर लोगों को वितरित किए जाएंगे।
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राम मंदिर में जगमगाएंगे झज्जर के दीये
झज्जर के शिल्पकारों ने मिट्टी के दीये तैयार कर राम मंदिर के लिए भी भेजे हैं, जो कि दिवाली के त्योहार पर राम मंदिर में जगमगाने का काम करेंगे। अलग-अलग शिल्पकारों ने मांग अनुसार राम मंदिर के लिए दीये भेजे हैं। पिछले वर्ष भी झज्जर से राम मंदिर के लिए मिट्टी के दीये भेजे गए थे। इसके अलावा अन्य जगहों पर मिट्टी के दीये भेजे गए हैं।
इस बार उसने 35 से 40 लाख मिट्टी के दीये तैयार किए हैं। मिट्टी के दीयों की मांग अनुसार मुंबई, गुजरात व राम मंदिर के लिए भेजा गया है। इसके अलावा हरियाणा के भी अलग-अलग क्षेत्रों के लिए मिट्टी के दीयों को भेजा जा चुका है। गुजरात के लोगों की मांग अनुसार करीबन 50 डिजाइन वाले दीयों को मंगवाया गया है, जिनको झज्जर में रंग-रोगन लगाने का काम किया गया।
इंद्रपाल खोहाल, शिल्पकार
इस बार उसने करीबन एक से डेढ़ लाख मिट्टी के दीये तैयार किए हैं। एक लाख दीयों को मांग अनुसार बेरी, पटोदी, कोसली, रेवाड़ी भेजा गया है। इसके अलावा करीबन 50 हजार दीयों को शहर झज्जर के साथ आसपास के गांवों के लोगों को वितरित किया जाएगा। जगह की कमी के कारण उन्होंने बीच में दीये बनाने के काम छोड़ दिया था, लेकिन बाद में फिर से शुरू कर दिया।
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राकेश, शिल्पकार
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