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मेजर मनकोटिया की अंतिम विदाई में नहीं पहुंचे कांग्रेसी मंत्री और विधायक

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गगल (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में चार दशक तक अपनी बेबाक और मुखर शैली के लिए पहचान बनाने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, लेकिन सुक्खू सरकार के मंत्रियों और कांग्रेस विधायकों की गैर-मौजूदगी दिनभर सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही। तियारा में अंतिम संस्कार में कांग्रेस पार्टी की ओर से केवल स्थानीय नेता देवेंद्र सिंह जग्गी, एपीएमसी के चेयरमैन नरेंद्र कुमार मोंगरा और नूरपुर के पूर्व विधायक अजय महाजन ही प्रमुख रूप से नजर आए।
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अंतिम यात्रा और श्मशान घाट पर सरकार के किसी भी कैबिनेट मंत्री या कांगड़ा जिले के अन्य कांग्रेसी विधायक की मौजूदगी नहीं दिखी। हालांकि शाहपुर के कांग्रेस विधायक केवल सिंह पठानिया ने सोशल मीडिया पर शोक संवेदना व्यक्त की थी।
राजनीतिक हलकों में इस अनुपस्थिति को मेजर मनकोटिया के लंबे राजनीतिक सफर और कांग्रेस के साथ रहे उनके रिश्तों के संदर्भ में देखा जा रहा है। मनकोटिया पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सरकार में दो बार मंत्री रहे थे, लेकिन कई मौकों पर उन्होंने अपनी ही सरकार की नीतियों और नेतृत्व पर खुलकर सवाल उठाए। वर्ष 2007 में सामने आई बहुचर्चित ऑडियो सीडी ने भी प्रदेश की राजनीति में भारी सियासी भूचाल ला दिया था। बाद के वर्षों में मनकोटिया कांग्रेस से लगातार दूर होते चले गए और 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वह भाजपा में शामिल हो गए थे।
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शाहपुर की राजनीति और पुरानी प्रतिद्वंद्विता को भी उनकी अंतिम यात्रा में कांग्रेस नेताओं की सीमित मौजूदगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इसको लेकर कांग्रेस नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। संवाद
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