कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने की कोशिश को भारत इंटरफेस फॉर मनी (भीम) ऐप की सुविधा न मिलने से झटका लग रहा है। बायोमेट्रिक सिस्टम से सीधे खाते से लेनदेन की सुविधा देने वाले इस ऐप को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी तो है ही। साथ ही बैंकों ने भी इसे बढ़ावा देने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है। यही वजह है कि भीम ऐप की डिवाइस अभी केवल तीन बैंकें ही दे रही हैं। इसमें भी इस डिवाइस को लेने वाले कारोबारियों की तादाद बेहद कम है।
कारोबार में करेंसी का इस्तेमाल कम करने के लिए व्यापारियों के लिए भीम ऐप की सुविधा दी गई है। व्यापारियों को इस ऐप की डिवाइस उन व्यापारियों को देना है, जो चालू खाताधारक हैं। इस ऐप की खासियत यह है कि इसमें एटीएम कार्ड की जरूरत नहीं होती, बल्कि इसमें कस्टम और व्यापारी दोनों के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम है। इससे लेनदेन के लिए किसी तरह के पासवर्ड की जरूरत नहीं होती। इसके अलावा व्यापारियों को इस ऐप के इस्तेमाल के लिए मासिक शुल्क की जरूरत भी नहीं होती। प्वाइंट ऑफ सेल (पॉस) मशीन की खामियों को देखते हुए यह ऐप तैयार किया गया था, लेकिन बैंकों की लापरवाही से इस ऐप को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। बैंक से जुड़े उच्च पदस्थ अधिकारियों की मानें तो इस भीम ऐप की डिवाइस केवल तीन बैंक एसबीआई, पीएनबी और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ही दे रही हैं। इन बैंकों ने भी भीम ऐप के लिए अपने करंट एकाउंट होल्डर व्यापारियों को बेहद कम डिवाइस ही दी हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि व्यापारी ही इस ऐप को लेकर ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे। जबकि व्यापारियों का कहना है कि ऐप की सुविधा गिनी चुनी बैंकें ही दे रही हैं। वे भी अपने ग्राहकों को डिवाइस देने के लिए कई चक्कर कटवा रही हैं। भीम ऐप को लेकर बैंकों की कम दिलचस्पी और व्यापारियों में इच्छाशक्ति की कमी की वजह से इसका सीधा असर सरकार के कैशलेस मिशन पर पड़ रहा हैं। इसे लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए अभी कोई खास मुहिम नहीं चलाई जा रही है।
नोटबंदी में पॉस मशीन का बढ़ा था क्रेज
करीब डेढ़ साल पहले नोटबंदी के दौरान कैशलेस सिस्टम ने जोर पकड़ा था। उस समय बड़ी संख्या में व्यापारियों ने प्वाइंट आफ सेल यानी पॉस मशीन के लिए बैंकों में आवेदन किए थे। पब्लिक में भी एटीएम कार्ड से पेमेंट करने में तेजी दिखाई दी। बाद में धीरे-धीरे करेंसी की किल्लत खत्म हुई तो लोगों का रुझान फिर से नकदी की तरफ बढ़ गया और व्यापारियों में पॉस मशीन लेने की जल्दबाजी ठंडी पड़ती चली है। यही वजह रही कि अभी बमुश्किल दस फीसदी दुकानदारों के पास ही पॉस मशीनें हैं। उसमें भी छोटे व्यापारियों की तादाद काफी कम है। पॉस मशीन को लेकर व्यापारियों की आम शिकायत यह है कि आए दिन नेटवर्क खराब रहने से मशीन का संचालन ठप रहता है। इसके अलावा ये मशीन के लिए बैंक आठ सौ से लेकर एक हजार रुपये तक का मासिक शुल्क भी वसूल करती हैं।