धर्मशाला। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में सालों से किसी नई पार्किंग की निर्माण नहीं हो पाया है। अब हालात ये होने लगे हैं कि अस्पताल में बनी पार्किंग वाहनों की तादाद के आगे छोटी पड़ने लगी है। अस्पताल परिसर में सालों से कबाड़ बनी कई गाड़ियों ने जगह रोक रखी है। सालों से एक ही स्थान पर खड़े रहने से गाड़ियां कबाड़ बन गई हैं। लंबा समय बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग इन वाहनों की नीलामी नहीं कर पाया है। अगर उन वाहनों को वहां से हटा दिया जाए तो उस स्थान पर अन्य वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था हो सकती है।
जानकारी के मुताबिक अस्पताल में जहां मरीजों के टेस्ट होते हैं, उसके साथ लगती जगह पर सालों से विभाग की पांच-छह एंबुलेंस और गाड़ियां खड़ी हैं। इसके अलावा शव गृह के पास भी कई गाड़ियां सालों से ऐसे ही सड़ रही हैं। अगर उन स्थानों पर चिकित्सकों या स्टाफ की गाड़ियों को पार्क कर दिया जाए, तो बाकी की पार्किंग मरीजों के वाहनों के लिए काम आ सकती है। अस्पताल में तीमारदारों से अधिक अस्पताल स्टाफ और चिकित्सकों के वाहन पार्क होते हैं। तीमारदारों को अपने वाहनों को पार्क करने के लिए यहां-वहां भटकना पड़ रहा है। अस्पताल में आपातकालीन वार्ड के बाहर केवल स्टाफ के लिए पार्किंग रखी गई है। वहीं, ऑक्सीजन प्लांट के पास केवल 10 से 12 वाहनों को खड़ा करने की ही जगह है। आपातकालीन वार्ड में मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों को वाहन खड़ा करने के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
ओपीडी वाले मुख्य द्वार वाली पार्किंग में भी चिकित्सकों के वाहन खड़े किए जाते हैं जबकि अन्य वाहनों के लिए जगह काफी कम है। अस्पताल में रोजाना 300 से अधिक वाहन आते हैं, लेकिन पार्किंग की व्यवस्था 50 वाहनों के लिए भी नहीं है। कुछ साल पहले स्मार्ट सिटी की ओर से धर्मशाला अस्पताल में बड़ी पार्किंग बनाने का प्रस्ताव रखा था लेकिन उस समय के तत्कालीन अधिकारियों ने यह कह कर पार्किंग का निर्माण नहीं होने दिया कि इससे उनका क्या लाभ होगा।
- मौजूदा समय में पार्किंग की कमी है। एक बार पहले अस्पताल की जमीन की निशानदेही करवाई जाएगी और उसके बाद पार्किंग के लिए स्थान चिह्नित किए जाएंगे। रही बात पुराने वाहनों की तो उनके बारे में सारी जानकारी हासिल कर नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। लैब के ऊपर वाली जगह पर पार्किंग के लिए बीडीओ कार्यालय से बात चल रही है। -डॉ. अनुराधा शर्मा, एमएस, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला