फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कानपुर में मुर्दे का इलाज कर रेफर किया लखनऊ पीजीआई

Fri, 22 Apr 2016 10:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
- फोटो : डेमो फोटो
विज्ञापन
एक अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी की मौत के बावजूद कृष्णा सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल हैरिसगंज में बिल बढ़ाने के लिए उन्हें जिंदा बताकर रखा गया और बाद में पीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया गया। 
विज्ञापन


बाद में डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया तो पता चला कि उनकी मौत रेफर करने से करीब 12 घंटे पहले हो चुकी थी। हालांकि मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा संभव नहीं। 

कोई भी डॉक्टर किसी शव को 12 घंटे तक रखकर इलाज का झूठ नहीं बोल सकता। कई बार हार्ट और ब्लड प्रेशर मिलता रहता है और डॉक्टर जूझते रहते हैं कि शायद मरीज बच जाए। इसके अलावा पोस्टमार्टम में बताए जाने वाले मौत के समय में 6-7 घंटे का हेर-फेर भी हो सकता है। 
विज्ञापन


इसलिए आरोप में दम नहीं लगता। एडवोकेट सुनील कुमार राठौर ने एडीएम सिटी अविनाश सिंह से शिकायत की है कि उन्होंने अपनी पत्नी ममता राठौर को 18 मार्च को कृष्णा सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल हैरिसगंज में डॉ. भानुप्रताप राठौर की देखरेख में भर्ती कराया था। 

इस दौरान बिल को लेकर कैश काउंटर पर बैठने वाले दीपेंद्र से विवाद हुआ था। 28 मार्च को डॉ. पूनम ने खाने की नली लगाई तो पत्नी को उल्टियां शुरू हो गई। इसके बाद डॉक्टर उसे आईसीयू में ले गईं। 

29 मार्च को दोपहर 3:20 बजे अस्पताल ने पीजीआई लखनऊ के लिए रेफर कर दिया। वहां वेंटीलेटर खाली न होने पर केजीएमसी ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया गया। वहां बताया गया कि पत्नी की मौत काफी पहले हो चुकी है। 
विज्ञापन

डॉक्टरों ने दिया ज‌िंदा होने का सुबूत

- फोटो : demo pic
फिर लायर्स और बार एसोसिएशन की मांग पर एडीएम सिटी के आदेश पर सीएमओ ने दो डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया। ममता राठौर का पोस्टमार्टम 30 मार्च को दोपहर 3:20 बजे हुआ था। 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 36 घंटे पहले मौत बताई गई, यह समय होता है 29 मार्च को सुबह करीब तीन बजे। ममता को कृष्णा हास्पिटल से 29 मार्च को दोपहर 3:20 बजे रेफर किया गया था। यानी रेफर करने से करीब 12 घंटे पहले ममता की मौत हो चुकी थी। 

अधिवक्ता गलत आरोप लगा रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी गलत है। मरीज को रेफर करते समय उसका हॉर्ट नॉर्मल था। हमारे पास उस समय की ईसीजी रिपोर्ट है। उनके जिंदा रहने का इससे बड़ा सबूत नहीं हो सकता।
-डॉ. वीके कपूर, चिकित्सा अधीक्षक, कृष्णा सुपर स्पेशलिटी हॉस्प‌िटल
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें