झज्जर। पराली जलाने की घटनाओं पर रोक और फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी और जागरूकता अभियान तेज किया है। डीसी वर्षा खांगवाल ने अधिकारियों को खेतों की नियमित निगरानी करने, पराली जलाने की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई करे के निर्देश दिए हैं।
डीसी ने कहा कि फसल अवशेषों को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में किसानों को पराली न जलाने तथा फसल अवशेष प्रबंधन की वैज्ञानिक एवं वैकल्पिक तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार जागरूक किया जाए।
डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पराली जलाने की आशंका वाले क्षेत्रों में नियमित फील्ड विजिट की जाए। संभावित घटनाओं की पहले से पहचान करते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने क्विक रिस्पॉन्स टीमों को सक्रिय रखने के निर्देश देते हुए कहा कि पराली जलाने की सूचना मिलते ही टीम तत्काल मौके पर पहुंचें और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे।
डीसी ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन के तहत पराली को खेत में मिलाने पर पात्र किसानों को प्रति एकड़ 1200 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस योजना सहित फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध तकनीकों और सरकारी प्रावधानों की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाई जाए।