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प्रशासन कह रहा रैन बसेरे का प्रबंध तो फिर खुले में क्यों सोने को मजबूर लोग

Sun, 25 Dec 2016 11:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
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मुनस्यारी के खलियाटाप में बर्फबारी से ढंके मकान - फोटो : अमर उजाला
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जिला रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा रैन बसेरों के आधे अधूरे प्रबंधों के कारण कोई सड़क पर रहने को तो कई खुले आसमान नीचे शरण ली हुई है। रविवार को अमर उजाला ने रेडक्रॉस के इन प्रबंधों का रियलिटी चेक किया तो पूरी व्यवस्था की पोल खुल गई। बिस्तरों पर मिट्टी की परत नजर आई। इतना ही नहीं बेड के ऊपर लगा ट्यूब लाइट का चैंबर लटका हुआ दिखा, जोकि सोए हुए व्यक्ति पर कभी भी गिर सकता है।
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बता दें कि कुरुक्षेत्र शहर में जहां रेडक्रॉस भवन कुरुक्षेत्र, जाट धर्मशाला, रोड धर्मशाला, ब्राह्मण धर्मशाला में नि:शुल्क ठहरने की व्यवस्था रेडक्रॉस ने की है। वहीं शाहाबाद, पिहोवा, बाबैन, इस्माईलाबाद में रैन बसेरा का कोई प्रबंध नहीं है।
 
शाहाबाद के एसडीएम हवा सिंह ने खुद माना कि रैन बसेरे का यहां प्रबंध नहीं है। जिला रेडक्रॉस सचिव कुलबीर मलिक ने बताया कि शाहाबाद के नागपाल अस्पताल में रैन बसेरा का प्रबंध किया गया है। सबसे बुरा हाल पिहोवा में है। जिला कुरुक्षेत्र के प्रमुख तीर्थ में शामिल पिहोवा में हालत यह है कि जिनके सिर पर छत नहीं वे यहां के शौचालय में रात गुजार रहे हैं।  
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प्रशासन की यह कैसी व्यवस्था सड़क किनारे भिखारियों व साधु आदि कई लोग इस हाड़ कंपाऊ ठंड में ठंड में खुले आसमान के नीचे सोने पर मजबूर हैं। वहीं प्रशासन रैन बसेरे को लेकर ठोस इंतजाम के दावे कर रहा हैं, लेकिन वास्तविकता इससे कोसों दूर है।

इस बारे में जब प्यारी दास वाराणसी, कृष्ण संधौला, निकुर, रंगदास चेन्नै, मीना देवी चेन्नै से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि रैन बसेरे क्या होते हैं, उन्हें तो पता नहीं। इतनी ठंड में जहां सिर ढकने को जगह मिल जाती है। वहीं रात काट लेते हैं। फिलहाल उनका ठिकाना सरस्वती तीर्थ, फुटपाथ, हाईवे, सुलभ शौचालय बने हुए हैं।

वहीं प्रशासन का कहना है कि ऐसे लोगों के लिए रैन बसेरे की व्यवस्था की गई है। इस बारे जब रेडक्रॉस सोसायटी सचिव कुलबीर से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि पिहोवा नपा सचिव से संपर्क कर लें। वो फिलहाल पिछले कुछ दिन से छुट्टी पर चल रहे हैं। वहीं जब इस बारे नपा सचिव जीवन सिंगला से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि प्रशासन द्वारा व्यास धर्मशाला में निराश्रितों के लिए कमरों की व्यवस्था की गई है। इन लोगों के लिए धर्मशाला में व्यवस्था की गई है। बाकी जानकारी के लिए आप रेड क्रास सोसायटी से संपर्क कर लें। दोनों विभाग के अधिकारियों के बयान से साफ जाहिर हो रहा है कि दोनों ही विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने की बजाय एक दूसरे पर अपनी जिम्मेदारी को थोप रहे हैं। प्रशासन ने सिर्फ खानापूर्ति करते हुए कह दिया कि रैन बसेरे की व्यवस्था व्यास धर्मशाला में की गई है। वहीं हकीकत इससे कुछ अलग ही है। व्यास धर्मशाला में ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है। व्यास धर्मशाला के प्रधान राजकुमार व्यास व सदस्य आशुतोष से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि धर्मशाला को रैन बसेरे के लिए बुक नहीं किया गया है। धर्मशाला में केवल कमरा बुक है, बाकी पूरी धर्मशाला बंद पड़ी हुई है तथा जो कमरा बुक है उसे यहां पाठशाला में आए विद्यार्थियों ने बुक किया हुआ है। प्रशासन की ओर कोई भी कमरा बुक नही है। इससे पता चलता है कि प्रशासन की ओर से रैन बसेरे के लिए कोई व्यवस्था ही नही गई है।       

 
शाहाबाद के एसडीएम की प्रतिक्रिया      
शाहाबाद में स्थित नौ गजा पीर बादशाह के ठीक सामने जीटी रोड के डिवाडर पर गर्मी, सर्दी, बारिश में एक व्यक्ति 24 घंटे लेटा रहता है। अमानवीयता की हद यह है कि दिन रात सड़क पर बीच डिवाइडर लेटे इस व्यक्ति को यहां से हटाकर माकूल जगह पर भेजने का प्रबंध क्यों नहीं किया जा रहा। इस विषय में शाहाबाद के एसडीएम हवा सिंह और जिला रेडक्रास के सचिव कुलबीर मलिक ने कहा कि यह अभी उनके संज्ञान में आया है। उक्त व्यक्ति जीटी रोड बीच सड़क से हटाकर व्यवस्था की जाएगी।       

     
रैन बसेरा न होने से लोगों को हो रही परेशानियां      
बाबैन में रात ठहराव के लिए कोई रैन बसेरा न होने पर लोगों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ रही है और ठहरने के लिए जरूरतमंद लोगों को इधर उधर भटकना पड़ता है। क्षेत्रवासी सुरेश कुमार, रवि कुमार, मलकीत सिंह, प्रदीप कुमार ने सरकार से मांग करने हुए कहा कि बाबैन में रात ठहराव के लिए रैन बसेरा बनाया जाना चाहिए ताकि रात को ठहरने के लिए यात्रियों को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पडे़।      
   
सरपंच ने कहा कि प्रबंध नहीं      
पिछले दिनों इस्माईलाबाद को मुख्यमंत्री मनोहर लाल नगर पालिका बनाने की घोषणा कर चुके हैं। अब इस क्षेत्र में रैन बसेरे की भी मांग हो रही है। कसबा में जहां ठंड बढ़ जाने से सभी लोग अपने घरों में दुबके हुए हैं। ठंड से बचने के लिए लोग अलाव आदि को सहारा ले रहे हैं। वहीं कस्बे में यात्रियों व राहगीरों के लिए रैन बसेरा न होने से कभी कभी यात्रियों व राहगीरों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात्रि के समय किसी कारण से यदि कोई यात्री लेट हो जाता है। उसे मजबूरन खुले आसमान के नीचे ठंड में रात्रि बितानी पड़ती है। सरपंच संजीव अरोड़ा ने कहा कि यहां पर कोई रैन बसेरा नहीं है। ग्राम पंचायत होने की वजह रैन बसेरे की जरूरत महसूस नहीं हुई फिर भी वे ग्राम पंचायत के मेंबरों से मिल कर इस विषय पर चर्चा अवश्य की जाएगी।
 
खुले आसमान में रहने वालों के लिए लाडवा में है पुख्ता प्रबंध            
लाडवा में सर्दी बढ़ने के साथ-साथ लोगों की मुसीबतें भी बढ़ने लगी हैं। सबसे ज्यादा समस्या उन लोगों को उठानी पड़ रही हैं जिनके सिर पर छत नही है। लाडवा के क्षेत्र में फुटपाथ पर रहने वाला कोई व्यक्ति या परिवार नही दिखाई देता फिर भी लाडवा में ऐसे किसी व्यक्ति या परिवार के लिए प्रशासन ने लाडवा के बाबा बंसीवाला वृद्धाश्रम में रैनबसेरा बनाया है। लाडवा पुलिस थाने के सामने स्थित बाबा बंसीवाला वृद्धाश्रम में इस समय करीब 20 वृद्ध रह रहे हैं। वृद्धाश्रम के प्रधान अशोक पपनेजा का कहना है कि वृद्धाश्रम के साथ संस्था द्वारा अन्नक्षेत्र भी चलाया जा रहा है जिसमें असहाय लोगों के लिए भोजन का भी निशुल्क प्रबंध है।
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